काशीपुर। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) ने मैनेजमेंट एजुकेशन एंड रिसर्च कोलोक्वियम (एमईआरसी) 2026 के छठे संस्करण का शुभारंभ किया। इसमें देशभर के शोधार्थियों और शिक्षाविदों ने भाग लिया। पॉली-क्राइसिस के युग में प्रबंधन की पुनर्कल्पना विषय पर आधारित इस कोलोक्वियम में विभिन्न प्रबंधन विषयों पर 93 शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण ऑफलाइन एवं हाइब्रिड माध्यम से हुआ।
आईआईएम के निदेशक प्रो. नीरज द्विवेदी ने प्रबंधन शिक्षा की बदलती प्रकृति तथा वर्तमान अनिश्चित वैश्विक परिदृश्य में सततता, अनुकूलनशीलता और अंतरविषयी सोच के महत्व को बताया। प्रथम मुख्य वक्तव्य सत्र में नॉर्थ ईस्टर्न यूनिवर्सिटी के जेफ बॉर्नस्टीन फैकल्टी फेलो एवं सप्लाई चेन एंड इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट विशेषज्ञ प्रो. आनंद नायर ने पॉली-क्राइसिस के युग में प्रबंधन की पुनर्कल्पना, प्रौद्योगिकी, सततता और लचीलेपन का मार्गदर्शन विषय पर विचार साझा किए।
प्रो. नायर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की विकसित होती भूमिका पर भी चर्चा करते हुए प्रतिस्थापन के बजाय मानवीय क्षमताओं के संवर्धन पर जोर दिया। संगठनों को प्रबंधकीय निर्णयों में सततता, लचीलापन और दीर्घकालिक दृष्टिकोण को शामिल करने की आवश्यकता बताई।
वैश्चिक परिवेश में बाजारों में बढ़ती परस्पर निर्भरता
दोपहर बाद हुए सत्र में भारतीय प्रबंधन संस्थान कोझिकोड के प्रो. जी. श्रीधर ने द एंटैंगल्ड मार्केटप्लेस: ए पॉलीक्राइसिस वर्ल्ड में मार्केटिंग सिस्टम्स विषय पर व्याख्यान दिया। इसमें वे अनिश्चित वैश्विक परिवेश में बाजारों, उपभोक्ताओं और संस्थानों के बीच बढ़ती परस्पर निर्भरता पर चर्चा की। सम्मेलन के दौरान अर्थशास्त्र, विपणन, वित्त, संचालन, रणनीति, संगठनात्मक व्यवहार और लोक नीति सहित विभिन्न विषयों पर समानांतर शोध पत्र प्रस्तुति सत्र भी आयोजित किए गए।