जसपुर। मदरसा जामिया अरबिया अहले सुन्नत बदरुल उलूम की प्रबंध कार्यसमिति ने 88वां सालाना जलसा-ए-दस्तारबंदी का आयोजन किया। यहां नौ छात्रों को फजीलत, सात को आलमियत, 21 को मौलवियत, 28 को किरात और चार छात्रों को कुरान हिफ्ज की दस्तारबंदी की गई।
शनिवार रात इशा की नमाज के बाद लकड़ी मंडी चौक पर आयोजित जलसे में मुख्य अतिथि जामिया हमदर्द देहली के प्रोफेसर मोहम्मद अहमद नईमी ने सभी छात्रों के सिरों पर दस्तार बांधकर डिग्रियां प्रदान कीं। उन्होंने उपाधि पाने वाले सभी छात्रों से अपने किरदार से मजहब की सही तस्वीर को समाज के सामने रखने का आह्वान किया। सैय्यद शाने आलम मिस्बाही ने नाते रसूल पढ़कर समा बांधा।
मुफ्ती मोहम्मद यूनुस और कारी शरीफ अहमद ने भी मजलिस को संबोधित किया। अध्यक्षता मुफ्ती-ए-शहर शमीम अख्तर सअदी और संचालन मौलाना इनामुल हक ने किया। वहां मौलाना शोएब, सज्जाद हुसैन, तकीउर्रहमान, मोहम्मद आलम, डाॅ. यूनुस चौधरी, हाजी नसीम अहमद, मोहम्मद अफजाल, हाफिज अली हुसैन आदि थे।