क्षेत्र में 60 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। संभावित खतरे की आशंका से प्रशासन सतर्क हो गया है। इसके मद्देनजर छह बाढ़ सुरक्षा चौकियां स्थापित कर 42 कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है। 15 जून से बाढ़ सुरक्षा चौकियों का संचालन किया जाएगा। ये कर्मचारी प्रतिदिन क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों से जिला प्रशासन को अवगत कराएंगे।
जिलाधिकारी डा. नीरज खैरवाल के आदेश के बाद तहसील प्रशासन क्षेत्र में संभावित बाढ़ से निपटने की तैयारियों में जुट गया है। तहसील स्तर पर सितारगंज, शक्तिफार्म व नानकमत्ता क्षेत्र के करीब 60 गांवों को बाढ़ की दृष्टि से अतिसंवेदनशील माना गया है। इन गांवों में विशेष निगरानी बरतने और सुरक्षा के लिए छह बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। इन चौकियों के लिए तहसील को कंट्रोल रूम बनाया गया है। प्रत्येक चौकी पर एक-एक टीम प्रभारी नियुक्त किया गया है और छह-छह कर्मचारी तैनात किए गए हैं। तहसीलदार शेर सिंह ग्वाल ने बताया कि पिछले दस साल से लगातार सितारगंज क्षेत्र में बाढ़ से तबाही मचती है।
बताया कि जिन गांवों को अतिसंवेदनशील माना गया है, वे सितारगंज की कैलाश नदी व बैगुल नदी, शक्तिफार्म की सूखी नदी और नानकमत्ता की देवहा एवं कामन नदी के मुहाने पर हैं। बताया कि 15 जून से 30 सितंबर तक चौकियों का संचालन होगा। प्रत्येक चौकी पर छह कर्मचारी तैनात किए गए हैं, जिनकी देखरेख के लिए एक टीम प्रभारी नियुक्त किया गया है। तहसील के प्रशासनिक अधिकारी सुरेश चंद्र पंत को बाढ़ प्रभारी बनाया है।