दो साल पहले ग्राम पंचायत रामनगर काशीपुर के लोगों को जब इंदिरा आवास स्वीकृत हुए तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। ग्रामीणों को मकान बनाने के लिए पहली किश्त मिल गई, जिसके बाद उन्होंने मकान का काम शुरू कर दिया। वहीं तय समय पर दूसरी किस्त नहीं मिलने पर मकान का काम शुरू कर चुके लोगों को ब्याज पर पैसे लेकर मकान बनाने पड़े। अब दो साल बाद भी लोगों को दूसरी किस्त के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। वहीं उन्हें ब्याज चुकाना भी महंगा पड़ रहा है।
ग्राम पंचायत रामनगर-काशीपुर में लगभग दो साल पूर्व इंदिरा आवास बनाए गए थे, जिसके लिए सरकार की ओर से दो किश्तों में 70 हजार रुपये मिलने थे। शुरूआत में ग्रामीणों को पहली किस्तों के तौर पर 42 हजार रुपये मिल गए। लोगों ने मकान बनाना शुरू कर दिया। लेकिन जब मकान आधा बनकर तैयार हो गया तो लोग दूसरी किस्त का इंतजार करने लगे। दूसरी किस्त के इंतजार में एक साल बीत गया तो लोगों ने अधिकारियों के चक्कर काटने शुरू कर दिए, लेकिन अधिकारियों से मात्र कोरे आश्वासन मिलते रहे। इस दौरान लाभार्थियों ने ब्याज पर रुपये लेकर अधूरे मकान को पूरा बनवाया। काफी समय बीतने के बाद भी मकान की दूसरी किस्त नहीं आई।
स्कोर्ट फार्म निवासी सविता पत्नी देव कुमार को इंदिरा आवास के लिए पहली किस्त के रूप में 42 हजार रुपये मिले थे। लिंटर डालने तक रुपये खत्म हो गए, जिससे लिंटर अधूरा रह गया। इस पर उन्होंने प्रधान और सेक्रेटरी से दूसरी किस्त के बारे में जानकारी ली। दोनों ने पहले लिंटर डालने और उसके बाद दूसरी किस्त मिलने का आश्वासन दिया। इस पर लाभार्थी ने ब्याज पर पैसे लेकर मकान का लिंटर डलवा दिया, लेकिन अब तक उसे दूसरी किस्त नहीं मिल सकी है। पीड़ित ने बताया कि अब उसपर ब्याज का बोझ बढ़ता जा रहा है। ऐसे में उसे परिवार का पालन पोषण करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
मामला अब संज्ञान में आया है। इंदिरा आवास के लाभार्थियों को दूसरी किस्त क्यों नहीं मिली, इस संबंध में अधिकारियों से जानकारी ली जाएगी। लाभार्थियों को शीघ्र दूसरी किस्त मिले इसके लिए अधिकारियों को निर्देशित किया जाएगा।
डॉ. नीरज खैरवाल, जिलाधिकारी, ऊधम सिंह नगर।