खटीमा। फायर सीजन में वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। खटीमा उप वन प्रभाग के तीनों रेंज में 24 क्रू सेंटर स्थापित किए गए हैं। साथ ही प्रत्येक क्रू सेंटर पर तीन-तीन फायर वॉचर की तैनाती गई है।
पतझड़ शुरू होने और गर्मी नजदीक आते ही वन विभाग के सामने जंगलों को वनाग्नि की घटनाओं से बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। पतझड़ में पेड़ों के सूखे पत्ते गिरने से सुरई, किलपुरा और खटीमा रेंज के जंगलों में सूखे पत्तोें के ढेर लग गए हैं, जिससे जरा सी लापरवाही से जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ गया है। खटीमा उप वन प्रभाग की एसडीओ संचिता वर्मा ने बताया कि तीनों रेंज में 24 क्रू सेंटर स्थापित किए गए हैं। सुरई रेंज में सर्वाधिक 13 क्रू सेंटर बनाए गए हैं जबकि खटीमा रेंज में सात और किलपुरा रेंज में चार क्रू सेंटर बनाए गए हैं। प्रत्येक क्रू सेंटर में तीन-तीन फायर वॉचर की तैनाती की गई है। साथ ही उन्हें वायरलेस सेट, अग्निशमन उपकरण आदि उपलब्ध करा दिए गए हैं। फायर वॉचर गश्त भी करेंगे।
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फायर लाइन की सफाई करना चुनौती
खटीमा। पतझड़ शुरू होते ही जंगलों के बीच बनाई गई फायर लाइनें भी पत्तों से ढक गई हैं। यदि इन फायर लाइन की जल्द सफाई नहीं की गई तो जंगल के एक हिस्से में लगी आग के दूसरे हिस्से में फैलने की आशंका रहती है। फायर लाइन की नियमित सफाई होने से आग को जंगल के दूसरे हिस्से में फैलने से बचाया जा सकता है। लोहियाहेड रोड, झनकईया रोड, बग्गा चौवन, सूखापुल, गौसीकुआं, चौड़ापानी आदि गावों के पास जंगलों में आग लगने की काफी घटनाएं होती हैं। संवाद
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