ऊधमसिंह नगर में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव लड़ने वाले 201 ऐसे व्यक्ति है, जिन्होंने अपने चुनावी खर्च और आय-व्यय का ब्योरा निर्वाचन आयोग को नहीं सौंपा है। इनमें चुनाव जीतने वाले नौ जिला पंचायत सदस्य भी शामिल है। निर्वाचन आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए खर्च का विवरण न देने वालों को अगले चुनाव के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है। अयोग्य घोषित किए व्यक्ति अब त्रिस्तरीय चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। यह खुलासा ग्राम मिस्सरवाला निवासी आसिम अजहर की ओर से आरटीआई एक्ट के तहत 25 अगस्त 2018 को मांगी गई जानकारी से हुआ है।
उत्तराखंड में 27 जून 2014 को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हुए, जिसका परिणाम 30 जून 2014 को जारी किया गया। चुनाव संपन्न होने के बाद जनपद ऊधमसिंह नगर में त्रिस्तरीय चुनाव लड़ने वाले 201 उम्मीदवारों ने अपने आय-व्यय का ब्योरा निर्वाचन आयोग को नहीं सौंपा था। इनमें जिला पंचायत, ग्राम प्रधान, बीडीसी सदस्य और ग्राम पंचायत सदस्य पद के प्रत्याशी शामिल हैं। नियमानुसार चुनाव लड़ने वाले व्यक्तियों को एक माह के भीतर चुनाव से संबंधित आय-व्यय का ब्योरा निर्वाचन आयोग को देना होता है।
जब संबंधित लोगों ने ब्योरा नहीं दिया तो उन्हें 20 दिन का नोटिस दिया गया लेकिन फिर भी संबंधित लोगों ने चुनाव खर्च का विवरण जमा नहीं कराया। आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में लोक सूचना अधिकारी ने अवगत कराया कि जिले में कुल 42 जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित घोषित किए गए थे। इनमें से नौ जिला पंचायत सदस्य ऐसे हैं, जिन्होंने चुनाव मद में हुए आय-व्यय का ब्योरा अभी जमा नहीं किया है। इसी तरह तमाम हारे हुए प्रत्याशियों ने भी निर्वाचन आयोग को आय-व्यय का विवरण जमा नहीं कराया। विभिन्न पदों पर चुनाव लड़ने वाले ऐसे प्रत्याशियों की संख्या 201 है।
अयोग्य घोषित किए गए नौ जिला पंचायत सदस्य
खटीमा के भूड़ाकिश्नी से कविता देवी, नोगावाठगूंग से पूनम राणा, मुंडेली से रविंद्र सिंह, भुडमहेलिया से वहीद उल्ला खां, सितारगंज की गौरीखेड़ा से बमनप्रीत कौर, काशीपुर के दभौरा मुस्तहकम से जितेंद्र सिंह, जसपुर के पतरामपुर से सरदारा सिंह, उमरपुर से उर्मिला देवी और सरवरखेड़ा से ताहिर हुसैन।