ऊधम सिंह नगर जिले में छोटी, बड़ी जोत के 18 हजार से अधिक किसानों पर सहकारी बैंकों का 94.48 करोड़ रुपये का कर्ज है। हालांकि सहकारी बैंकों की ओर से पिछले तीन साल में किसी भी कर्जदार के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।
सहकारी बैंकों के अमीन अपने स्तर से ही कर्जदार किसानों से वसूली कर रहे हैं। पिछले छह माह के भीतर सहकारी बैंकों ने 292 करोड़ रुपये का लोन जिले के किसानों में बांटा है, जबकि पूरे जिले में किसानों पर सहकारी बैंकों के लोन की बकायेदारी 94 करोड़ 48 लाख रुपये के लगभग है। प्रदेेश में कृषि उपज पैदा करने में अहम भूमिका निभाने वाले इस जिले के किसान भी कर्ज लेने में पीछे नहीं हैं। तराई में खेती के लिए अधिकतर किसानों को बैंकों से लोन लेना पड़ता है, लेकिन फसल को बाजार में बेचने के बाद किसान लोन चुकाने में भी पीछे नहीं हैं। सहकारी बैंकों ने छह माह के लोन की रिकवरी भी 61 फीसदी कर ली है। जिले में जिला सहकारी बैंक की विभिन्न शाखाओं से जुड़े किसानों की संख्या 60 हजार है, जबकि इनमें सहकारी बैंक शाखाओं के सदस्यों पर लगा लोन 29240.12 लाख रुपये है। इनमें बड़ी जोत के किसान सदस्यों पर लोन 9616.85 है जबकि लघु एवं सीमांत किसानों पर लोन की राशि 19623.27 लाख रुपये है। इसमें पूरे जिले से बकायेदार सदस्यों की संख्या 18341 है। इनमें बकायेदार किसानों पर लोन की राशि 9448.96 लाख है।
तहसील बकाया सदस्य सं. बकाया ऋण ऋण बड़ी जोत ऋण छोटी जोत कुल ऋण
1. खटीमा 1641 756.87 लाख 1058.22 लाख 2703.30 लाख 3761.52 लाख
2. सितारगंज 4268 1999.56 लाख 1461.08 लाख 2437.61 लाख 3898.69 लाख
3. किच्छा 1066 547.32 लाख 995.88 लाख 2032.09 लाख 3027.97 लाख
4. रुद्रपुर 562 315.54 लाख 580.42 लाख 1148.35 लाख 1764.77 लाख
5. गदरपुर 3210 1818.48 लाख 1658.82 लाख 3348.82 लाख 5043.64 लाख
6. बाजपुर 3241 2008.85 लाख 2102.39 लाख 3922.70 लाख 6025.09 लाख
7. काशीपुर 2297 1158.91 लाख 1090.20 लाख 2224.55 लाख 3314.75 लाख
8. जसपुर 2156 843.43 लाख 790.40 लाख 1613.06 लाख 2403.54 लाख
कुल योग 18341 9438.96 लाख 9616.85 लाख 19623.27 लाख 29240.12 लाख
बैंक से संबद्ध समितियों और समितियों से सदस्य कृषकों को वित्तपोषण किया जाता है। समितियां सदस्यों से संग्रह अमीन, कर्मचारियों के सहयोग से लोन की वसूली करती हैं। लगभग तीन वर्षों से जिले के बकायेदार कृषकों पर बैंक की ओर से कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। मई 2017 तक बैंक के ऋण की 61.44 फीसदी वसूली हुई है। वसूली में कमी आने का मुख्य कारण नोटबंदी और कृषकों में ऋण माफी की अपेक्षाएं हैं। तराई के किसान ऋण चुकाने में ज्यादा परेशान नहीं करते हैं।
- सुभाष बेहड़, अध्यक्ष जिला सहकारी बैंक लि. ऊधमसिंह नगर।