खटीमा। नेपाल से लगी नगरा तराई गांव के सनिया नाले के पास वन विभाग की जमीन से सागौन के 15 खड़े पेड़ काट दिए गए लेकिन विभाग को इसकी भनक तक न लगी। मामला सुर्खियों में आया तो रेंजर ने निजी खेत स्वामी पर चार पेड़ काटने का मामला वन अधिनियम में दर्ज किया। वन महकमा सागौन के पेड़ों को निजी भूमि में बताकर पल्ला झाड़ रहा है।
खटीमा के सनिया नाले से लगे एक खेत में सागौन के 23 पेड़ लगे हुए हैं। इनमें से 15 पेड़ों की ठूंठ स्पष्ट दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पांच पेड़ एक हफ्ते के अंदर और 10 पेड़ पिछले दो दिन के अंदर काटे गए हैं। काटे गए पेड़ो की जड़ों में कटान के समय की जाने वाली वन विभाग की नंबरिग की तर्ज पर 3-10 और 4-10 आदि लिखा गया है।
वन वॉचर के आवास से कुछ दूरी पर हुआ है कटान
खटीमा। कटान वाले स्थल से कुछ ही फासले पर वन विभाग के वन वाचर इंद्र सिंह मेहर का भी आवास है। लेकिन पूछताछ में वन वाचर ने मामले की जानकारी से इनकार किया।
लकड़ी काटकर नेपाल ले गए तस्कर
खटीमा। सनिया नाले से लगी भूमि पर खड़े सागौन के पेड़ो के हुए कटान के बारे में लोग बताते हैं कि लकड़ी नेपाल भेजी गई है। लकड़ी का चिरान होने के बाद सागौन की फ्रेम वापस लाई जाएंगी।
कटान वाली भूमि किसकी है होगी जांच- हल्का पटवारी
खटीमा। कटान के बाद सुर्खियों में आए नगरा तराई सनिया नाले के पास अभी भी हरे भरे सागौन के आठ पेड़ खड़े हैं। हल्का पटवारी नेत राम ने बताया कि सागौन के पेड़ वाली जमीन किसकी है, इसकी जांच की जाएंगी।
सागौन के चार पेड़ दो सप्ताह पूर्व काटे गए है : रेंजर
खटीमा। वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) राजेंद्र सिंह मनराल ने बताया कि नेपाल सीमा पर जंगल से लगी सीमा पर प्रेम सिंह आदि की निजी भूमि है। उसमें खड़े सागौन के चार पेड़ दो सप्ताह पूर्व काटे गए हैं। उन्होंने बताया कि काटे गए सागौन के पेड़ों के अवशेष जब्त कर वन अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। कहा कि सागौन के पेड़ बिना अनुमति के काटे गए हैं।
अधीनस्थों से मांगी गई है जानकारी- डीएफओ
खटीमा। प्रभागीय वनाधिकारी पूर्वी तराई वन प्रभाग हल्द्वानी संदीप कुमार ने बताया कि नेपाल सीमा पर हुए सागौन के पेड़ों के कटान का मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने अधीनस्थों से पूरी जानकारी मांगी है। सही जानकारी न मिलने पर वह मामले की जांच कराएंगे।
खटीमा में नगरा तराई में काटे गए सागौन के पेड़ों की ठूंठ।- फोटो : KHATIMA