रुद्रपुर। कुमाऊं विश्वविद्यालय कॉमर्स और प्रबंधन संकाय के संकायाध्यक्ष प्रोफेसर अतुल जोशी ने कहा है कि प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देकर ही जीवन स्तर को सुधारा जा सकता है। पहाड़ का पानी और जवानी कौशल विकास से ही पहाड़ के काम आएगी। विकसित किए जा रहे पांच ईको टूरिज्म सर्किट देहरादून-ऋषिकेश, कोटद्वार, रामनगर- नैनीताल, यमुना- टौंस वैली और नंधौर-चंपावत राज्य की तस्वीर को निखारेंगे।
शुक्रवार को डिग्री कॉलेज में दीनदयाल उपाध्याय कौशल केंद्र की ओर से ‘स्किल्स इम्पावारिंग दी न्यू इंडिया’ विषय पर चल रही सात दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के तीसरे दिन प्रो. जोशी ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र का समुचित विकास ही पलायन पर प्रभावी नियंत्रण लगाएगा। डाबर कंपनी के एचआर हेड अवनेश यादव ने कहा कि केंद्र सरकार जिस तरह से कौशल विकास पर जोर दे रही है, इसके दूरगामी सकारात्मक परिणाम आएंगे।
महाविद्यालय के प्रबंधन विज्ञान विभाग के प्रभारी डॉ. पीएन तिवारी ने लेखांकन के गुर बताए। डॉ. संतोष कुमार अनल और एलआईसी के शाखा प्रबंधक राजेश तिवारी ने भी कार्यशाला को संबोधित किया। आयोजक सचिव डॉ. हरनाम सिंह ने बताया कि कार्यशाला के सुझावों को कौशल विकास से संबंधित मंत्रालयों को भेजे जाएंगे। इस दौरान कौशल केंद्र के विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार, डॉ. दिनेश शर्मा, डॉ. पुष्पा देवी, डॉ.डी के पी चौधरी, डॉ हरीश चन्द्र, डा. पीसी सुयाल, डॉ. मनीषा तिवारी, डॉ. शम्भू दत्त पाण्डेय, डॉ. भगवती जोशी, डॉ संतोष मौर्या आदि थे।