रुद्रपुर। नैनीताल हाईवे से सटे 12 एकड़ जमीन पर 12 फूड प्रोसेसिंग इकाइयां स्थापित करने की कवायद शुरू हो गई है। मंडी परिषद के अधिकारियों का कहना है कि इकाइयों के स्थापित होने से जहां किसानों को लाभ होगा। वहीं मंडी की आय में हर साल सात करोड़ तक वृद्धि होगी।
मंडी परिषद की 12 एकड़ से अधिक जमीन नैनीताल हाईवे पर है। इस जमीन को सालों से सिडकुल की अशोका लीलेंड कंपनी को लीज पर दिया जा रहा था। इससे मामूली किराया मिल रहा था।
मंडी की आय बढ़ाने और जमीन का उपयोग करने के लिए मंडी परिषद ने जमीन पर किसानों के लिए दुकानें बनाने और 12 नई फूड प्रोसेसिंग इकाइयां खोलने की तैयारी शुरू कर ली है।
बाकायदा निविदाएं आमंत्रित की हैं। इसका प्रस्ताव बनाकर पहले ही शासन को भेजा जा चुका है। फूड प्रोसेसिंग इकाइयां स्थापित करने का उद्देश्य कृषि उपज का मूल्य संवर्धन करना और किसानों-ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार देना है।
तकनीकी निर्माण पर 35 प्रतिशत पूंजीगत अनुदान
सरकार, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के तहत प्रोत्साहन दे रही है। इसमें संयंत्र, मशीनरी और तकनीकी निर्माण पर 35 प्रतिशत पूंजीगत अनुदान (कैपिटल सब्सिडी) का प्रावधान है जिसकी अधिकतम सीमा पांच करोड़ रुपये है। इकाइयों के विस्तार या आधुनिकीकरण के लिए भी लागत का 35 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है जिसकी अधिकतम सीमा एक करोड़ रुपये तक है। साथ ही इकाई में साैर ऊर्जा संयंत्र लगाने पर भी अनुदान मिल रहा है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री औपचारिकरण सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना (पीएमएफएमई) के तहत भी इकाई स्थापित कराई जा रही हैं।
कृषि उपज का मूल्य संवर्धन करने और किसानों-ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार देने के लिए फूड प्रोसेसिंग इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। इकाइयां खुलने से सरकारी जमीन का सदुपयोग भी होगा और रोजगार के द्वार भी खुलेंगे। -
अनिल डब्बू, मंडी परिषद अध्यक्ष।