रेलवे की 106 किलोमीटर लंबी लाइन का जिम्मा आरपीएफ के केवल 15 सिपाहियों के हवाले है। इस दायरे में छह स्टेशन और सात हाल्ट आते हैं, जिनमें 36 पैसेंजर और 4 एक्सप्रेस ट्रेन हर रोज गुजरती हैं। स्टाफ की कमी के चलते रेलयात्रियों की सुरक्षा चुनौतीपूर्ण है।
काशीपुर रेलवे स्टेशन जंक्शन की 106 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन की सुरक्षा का जिम्मा रेलवे सुरक्षा पुलिस (आरपीएफ) के हवाले है। इसमें रामनगर से मुरादाबाद की ओर गोट रेलवे स्टेशन तक 70 किलोमीटर है। काशीपुर से गूलरभोज तक 36 किलोमीटर रेलवे ट्रैक और यात्रियों की सुरक्षा का जिम्मा है। इसमें काशीपुर से मुरादाबाद की ओर 36 पैसेंजर ट्रेनें 6 स्टेशन 7 हाल्ट से होकर रोज गुजरती है। इसमें 3 से 4 ट्रेने एक्सप्रेस है, जो दिल्ली, हरिद्वार, बांद्रा मुंबई, बनारस के लिए जाती है। इसमें कई ट्रेन रात्रि में भी चलती हैं। इसके लिए आरपीएफ के पास स्टाफ पर्याप्त नहीं है।
हरिद्वार से रामनगर जाने वाली ट्रेन मुरादाबाद में अधिकतर खाली हो जाती है। ऐसे में यात्रियों की संख्या कम होने से मुरादाबाद से काशीपुर तक घटना होने की संभावना अधिक रहती है। इसके लिए मुरादाबाद से आरपीएफ के 3 सिपाहियों का स्कॉट ट्रेन को लेकर आता है और रामनगर रेलवे स्टेशन तक छोड़कर वापस लौटता है। वहीं काशीपुर से लालकुआं तक 3 से 4 ट्रेनें चलती है। इस मार्ग पर भी रात को ट्रेन आती जाती हैं, लेकिन इस मार्ग पर सुरक्षा कोई इंतजाम नहीं है। पूरी रेलवे संपत्ति की सुरक्षा आरपीएफ के महज 15 सिपाहियों के कंधो पर है। रेलवे चौकियों में लंबे समय से सिपाहियों की भारी कमी चली आ रही है, लेकिन सिपाहियों की कमी को नजर अंदाज किया जा रहा है।
स्टाफ कम होने के चलते दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, लेकिन सभी सिपाही पूरी तरह मुस्तैद रहते हैं। समय-समय पर पटरियों की देखरेख होती रहती है। स्टॉफ में 15 सिपाही हैं, जबकि क्षेत्र को देखते हुए 25 सिपाहियों की जरूरत है। आला अधिकारियों को सिपाहियों की तैनाती के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा।
-ओपी मीना आरपीएफ प्रभारी, काशीपुर रेलवे स्टेशन
इंस्पेक्टर मीना ने संभाला कार्यभार
काशीपुर। नवनियुक्त आरपीएफ इंस्पेक्टर ओपी मीना ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है। उनकी प्राथमिकता ट्रेनों में महिलाओं की सुरक्षा, अलार्म चेन पूलिंग सहित विभिन्न घटनाओं को रोकने की रहेगी। उनका कहना है कि सुल्तानपुर पट्टी के पास कोसी नदी के ऊपर से गुजरने वाली रेलवे ट्रेक के नीचे नदी से खनन माफिया ने खोद दिया। इससे रेलवे पुल के खंभे के नीचे से रेत निकाल लिया है। इस रेल ट्रेक की सुरक्षा करने को अधिक प्राथमिकता देंगे।