देवदर्शन को चारधाम आए ‘अपनों’ का अंतिम दर्शन भी उनके अपने नहीं कर पाएंगे। केदारघाटी में मौत से हारे और लाशों में तब्दील हो चुके तीर्थयात्रियों का अंतिम संस्कार भी संभवत: यहीं किया जाएगा।
उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज
हालांकि उनकी पहचान के लिए उनके डीएनए के नमूने लिए जा रहे हैं। इसी के आधार पर परिजन जान पाएंगे कि उनके अपने अब इस दुनिया में नहीं हैं।
गुप्तकाशी के देवशाल हेलीपैड पर देवी आपदा में मौत को मात देकर केदारघाटी से लौट रहे यात्रियों के चेहरे पर अपनों को खोने का जहां दर्द साफ दिखाई दे रहा है वहीं उन्हें इस बात का मलाल भी है कि शायद अब बिछड़े हुए लोगों का अंतिम दर्शन भी उन्हें नसीब नहीं होगा।
अभी भूला नहीं है तबाही का मंजर
एक यात्री ने सिसकते हुए कहा कि लाशें तो अब सड़ने लगी हैं, इनके परिजनों को अब इनके अंतिम दर्शन भी नहीं होंगे।
हर कदम पर पड़ी है लाश
अपनों को खो चुके और लाशों से गुजरकर आने वाले ये यात्री इतने बदहवास हो गए हैं कि किसी से बात करने के बजाय ये जल्दी से जल्दी सुरक्षित स्थान पर पहुंच जाना चाहते हैं। इसी में से कुछ यात्रियों को रोककर जब लाशों के बारे में इस पत्रकार ने पूछा तो उन्होंने बताया कि हर कदम पर लाश पड़ी है।
क्या बताऊं। कहीं चट्टान में फंसी है तो कहीं पेड़ पर अटकी हैं। अपनी जान का मोह है, इसलिए लाशों से मुंह मोड़ कर भागते रहे हम।
केदारघाटी में अब तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन सिर्फ जिंदा लोगों के लिए था। लाशों की ओर किसी ने ध्यान दिया। जब लाशें सड़ने लगी और महामारी फैलने का डर सताने लगा तो शासन प्रशासन हरकत में आया। संक्रमण रोकने के लिए ब्लीचिंग पाउडर भी रविवार को ही केदारघाटी पहुंचा।
चारों ओर बदबू फैलने लगी है
हालांकि फोरेंसिक टीम डीएनए के नमूना लेने के लिए शनिवार को ही घाटी में पहुंच चुकी थी। वहीं लाशों को ठिकाने लगाने के लिए सोमवार को पुलिसकर्मियों को केदारघाटी में भेजे जाने की संभावना है। ये लाशों का पंचनामा तैयार कर उनका अंतिम संस्कार कर देंगे। चारों ओर बदबू फैलने लगी है। सात दिनों में लाशें इस कदर सड़ चुकी है कि उन्हें ले जाना अब संभव नहीं है।