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हर दिन जिंदगी की नई जंग लड रहे पहाड़वासी...

Fri, 05 Jul 2013 04:18 PM IST
रुद्रप्रयाग/ब्यूरो
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उत्तराखंड में बीते दिनों आई जलप्रलय अपने साथ बहुत कुछ तबाह कर ले गई। पहाड़ी जनपदों के अभी भी सैंकडों गांव दुनिया के अन्य हिस्सों से कटे हुए हैं।
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एक पखवाड़े से भी ज्यादा वक्त गुजर जाने के बावजूद ना तो प्रशासन इन सड़कों को खोलने में सफल हो पाया है और ना ही अगले और लंबे समय तक इन सडकों की दुर्दशा सुधरने के आसार ही नजर आ रहे हैं।

इसका छोटा सा उदाहरण रुद्रप्रयाग जनपद में नजर आता है जहां उत्तराखंड में आपदा के 19 दिन बाद भी सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और प्रशासन का तालमेल नहीं बन पाया है। नतीजन अब तक रुद्रप्रयाग से छह किमी आगे नौला पानी से केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बहाल नहीं हो पाया।
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रुद्रप्रयाग से अगस्त्यमुनि के बीच बीआरओ ने सड़क खोलने के लिए सिर्फ 104 मजदूर काम पर लगाए हैं। मजदूरों की कमी के कारण काम रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। काम में हो रही लेटलतीफी को देखते हुए जिलाधिकारी दिलीप जावलकर ने बीआरओ को आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत नोटिस भेजने का निर्णय लिया है।

19 दिन में 100 मीटर सड़क
केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग 16 जून से अवरुद्ध चल रहा है। अब तक बीआरओ तिलवाड़ा से अगस्त्यमुनि के बीच अस्थायी रूप से ही यातायात चालू करा पाया है। 19 दिन में भी नौला पानी में 100 मीटर पैच ठीक नहीं हो पाया है। इसके अलावा विजयनगर और देवल के बीच बीआरओ ने 700 मीटर पैच में सड़क निर्माण शुरू कर दिया है।

शुक्रवार को डीएम ने बीआरओ के अफसरों को बुलाकर उनकी जरूरत पूछी। उन्होंने नाराजगी जताई कि बीआरओ समन्वय नहीं कर रहा है। यदि बीआरओ को मजदूरों और मशीन की जरूरत है, तो वह उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने बीआरओ और लोनिवि को समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए।

डीएम ने लोनिवि को एक पोकलैंड मशीन और मजदूर बीआरओ हेतु उपलब्ध कराने के लिए कहा। बहरहाल डीएम साहब तो नोटिस देकर अपने काम की इतिश्री भर कर लेना चाहते हैं, लेकिन प्रशासन की इस सुस्त गति से पहाड़ कें सैकडों गांव हर दिन जिंदगी की एक नई जंग लड़ने को बेबस हैं।
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हर दिन जंग लड़ रहे पहाड़वासी
ऐसे हालात में यदि यह अंदाजा लगाया जाए कि अगले एक साल में सरकार आपदा के निशान मिटाकर जिंदगी की नई इबारत लिखने में कामयाब होगी तो फिलवक्त यह बेमानी ही साबित होगा। सरकारी कार्यप्रणाली के चलते हर दिन ग्रामीण नई जंग लड़ रहे हैं और पहाड़ नई कहानी गढ़ रहा है।
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