जिला सहकारी बैंक और महिला समूह के बीच ऋण को लेकर उपजे विवाद का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। ऋण की वसूली के लिए बैंक ने दूसरी बार जब महिलाओं को नोटिस भेजा, तो उन्होंने बैंक में आकर नाराजगी जताते हुए ब्याज राशि देने से पूरी तरह इनकार कर दिया। उन्होंने तत्कालीन शाखा प्रबंधक और प्रधान को दोषी ठहराया है।
थौलधार ब्लॉक के ग्राम सुनार गांव की 16 महिला समूह ने 27 जनवरी 2012 को जिला सहकारी बैंक में ऋण के लिए आवेदन किया था। 26 मार्च को बैंक ने ऋण स्वीकृत कर सभी महिलाओं के खाते में चार लाख रुपये जमा करा दिए। महिलाओं का कहना है कि ऋण राशि खाते में जमा होने का पता तब चला जब पिछले नवंबर माह में उन्हें वसूली के लिए बैंक से भेजा गया नोटिस मिला। गुस्साई महिलाओं ने बैंक में जाकर रोष जताते हुए कहा कि उन्हें ऋण स्वीकृत होने की जानकारी नहीं दी गई। महिलाओं को फिर से नोटिस भेजे जाने पर वह सोमवार को बैंक में आ धमकी। उन्होंने तत्कालीन शाखा प्रबंधक और प्रधान को दोषी ठहराते हुए 11-11 हजार रुपये की ब्याज राशि देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें फिर से नोटिस भेजा गया, तो वह बैंक परिसर में बेमियादी धरना शुरू करेंगी। विरोध जताने वालों में सुंदरी देवी, विमला देवी, एलमा देवी, शीला, अनीता, संगीता, कैलाशी देवी, पूर्णिमा, परिभाषा देवी, शकुंतला, कविता, वासु देवी और रंजीता देवी आदि शामिल थीं। इस बाबत जिला सहकारी बैंक के शाखा प्रबंधक राकेश पुरी ने कहा कि स्थिति से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है, वहीं से कोई निर्णय लिया जाएगा।