पर्वतीय क्षेत्र में कृषि योजनाओं को प्रोत्साहन देने और किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है, लेकिन जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए कोई भी योजना न होने से काश्तकार परेशान हैं।
भिलंगना ब्लाक के ग्यारहगांव, हिंदाव, नैलचामी, केमर, बासर, आरगढ़, गोनगढ़, बूढ़ाकेदार, कोटी फैगुल और दुंगमंदार के काश्तकारों के खेतों में इन दिनों गेहूं, जौ, चना, मटर, सरसों की पौध तैयार है, लेकिन जंगली सूअर और बंदर खेतों में जाकर फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। काश्तकार मनमोहन डिमरी, अमनदीप भट्ट, देवेश्वर प्रसाद, विमला देवी कहना है कि सरकार काश्तकारों को कृषि उपकरण, खाद, बीज दे रही है। शून्य प्रतिशत व्याज पर ऋण भी मुहैया कराया जा रहा है, लेकिन जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए कोई भी योजना नहीं बनाई जा रही है। जंगली जानवर फसलों को नुकसान पहुंचाकर काश्तकारों को सीधे आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। शिकायत के बावजूद वन विभाग ध्यान नहीं दे रहा है। वन रेंज अधिकारी एसएस नेगी का कहना है कि बंदरों को पकड़ने के लिए समय-समय पर अभियान चलाया जाता है, लेकिन रात्रि गश्त के लिए विभाग के पास कर्मचारी नहीं है।