चार साल बाद भी नहर की मरम्मत नहीं होने से कठूली में बंजर हुए खेत
नई टिहरी। जाखणीधार ब्लॉक के कठूली मय बडिल सिंचाई नहर का लंबे समय बाद भी मरम्मत नहीं होने से ग्रामीणों ने खेती करनी छोड़ दी है। ग्रामीण पहले सिंचित भूमि पर धान, गेहूं, मटर से लेकर औषधीय पादपों की खेती करते थे, लेकिन तीन साल से नहर क्षतिग्रस्त होने से सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है।
धारमंडल पट्टी के कठूली और मय बडिल गांव के करीब 200 परिवार वर्षों से धान, गेहूं, मटर समेत कई नकदी फसलों की खेती करते थे, लेकिन गांव में बंदरों से लेकर अन्य जंगली जानवरों के डर से ग्रामीण 70 परिवारों ने 2014-15 से ओरेगेनो की खेती भी शुरू की थी। ग्रामीण ओरेगेनो से प्रत्येक वर्ष 50 हजार से लेकर 5 लाख रुपये तक मुनाफा कमा रहे थे।
बिसातली गदेरों से बनी चार किमी लंबी नहर से खेतों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलता था। नहर का रखरखाव भी ग्राम पंचायत के अधीन था। बावजूद 2019 की आपदा में नहर के विभिन्न स्थानों पर करीब 400 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके बाद नहर से पानी आना बंद हो गया। चार साल बाद भी नहर की मरम्मत नहीं हो पाई है।
ग्राम पंचायत के पास नहर की मरम्मत के लिए बजट नहीं होने के कारण ग्रामीण सिंचाई विभाग से लेकर प्रशासन के चक्कर लगा रहे हैं। पूर्व प्रधान बसु देवी, मीना पंवार, उत्तम सिंह भंडारी, कसरी देवी, गुड्डी देवी, उमा देवी, ऐलमा देवी, असाड़ी, विनीता पंवार ने बताया कि नहर की मरम्मत नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने खेती करनी छोड़ी दी है।
बताया कि लंबे समय से शासन-प्रशासन से नहर की मरम्मत करवाकर सिंचाई के लिए पानी मुहैया कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। सरकार एक तरफ खेती के माध्यम से आजीविका बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रही है, वहीं सिंचाई की समस्याओं का समाधान नहीं कर रही है। ईई अनूप डिंयूडी ने बताया कि अधिकारियों को क्षतिग्रस्त नहर का निरीक्षण मरम्मत पर आने वाले खर्च की आगणन बनाने के निर्देश दिए गए हैं।