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सड़क नहीं होने से कालावन तेगना के ग्रामीण कर रहे पलायन

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पिछले 8-10 वर्षों से कालावन तेगना के ग्रामीण सड़क का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी है। सड़क नहीं होने से 80 परिवारों के सामने पांच किमी की पैदल दूरी तय करने की मजबूरी बनी हुई है। सड़क के अभाव में पिछले पांच सालों में गांव के 10 परिवार पलायन कर चुके हैं। बावजूद अब भी ग्रामीणों की कोई सुध लेने वाला नहीं है।
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जौनपुर ब्लॉक का कालावन तेगना गांव पूर्व में राजस्व ग्राम मंजगांव के अंतर्गत आता था। वर्ष 2002 में हुए परिसीमन में यह क्षेत्र कालावन तेगना ग्राम पंचायत के रूप में अस्तित्व में आ गई थी। कालावन तेगना के ग्रामीण 8-10 वर्षों से गांव के लिए कद्दूखाल से सड़क निर्माण की मांग करते आ रहे हैं। ग्रामीण कई मंचों के माध्यम से सड़क निर्माण की मांग पूर्व में उठाते आए हैं। शासन-प्रशासन को भी ज्ञापन प्रेषित किया गया। गांव के सड़क सुविधा से वंचित होने पर गांव से लगातार लोग पलायन कर रहे हैं। गत पांच वर्षों में 10 परिवारों ने यहां से पलायन कर लिया है। वर्तमान में 80 परिवार ही शेष रह गए हैं। बीते 20 अक्तूबर 2021 को ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर क्रमिक अनशन शुरू किया था। धनोल्टी विधायक प्रीतम पंवार के आश्वासन पर ग्रामीणों ने आंदोलन स्थगित किया था।
गांव के किसी व्यक्ति के बीमार होने या कोई दुर्घटना होने पर जन सहयोग से रोगियों को सड़क तक पीठ पर लादकर लाना पड़ता है। गंभीर बीमारों को यहां से 90 किमी दूर देहरादून ले जाना पड़ता है। कालावन क्षेत्र कृषि के लिहाज से महत्वपूर्ण स्थान है। यहां पर आलू, मटर, बंद गोभी, फूलगोभी सहित कई नकदी फसलों और सब्जियों की अच्छी पैदावार होती है, लेकिन सड़क सुविधा न होने के कारण ग्रामीणों की फसलें घरों में रह जाती है।
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हर चुनाव में वोट मांगने के लिए प्रत्याशी गांव में आते है। सड़क निर्माण करवाने का कोरा आश्वासन देकर चले जाते है। क्षेत्र के विकास के लिए गांव के लोगों को भी अपनी विकास योजनाएं बनाने की जरूरत है। राज्य बनने के 21 वर्ष बाद कालावन तेगना के लोगों के लिए सड़क सपना बनकर ही रह गई है।
-ममता दंदेला, ग्राम प्रधान, कालावन तेगना
पलायन रोकने के लिए सरकारें बड़े-बड़े दावे कर रही है, जब तक गांवों में सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं होती पलायन किसी भी दशा में रुक नहीं सकता है। सड़क निर्माण न कर सरकार हमें पलायन करने को मजबूर कर रही है। प्रशासन के उच्च अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सड़क निर्माण की मांग शासन तक कई बार पहुंचाई, लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है।
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-प्रेम सिंह भंडारी, निवासी कालावन तेगना
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