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इस बार नवरात्र चार दुर्लभ संयोगों से बन रहा है खास

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आदि शक्ति स्वरूपा की आराधना का नौ दिवसीय महापर्व शारदीय नवरात्र 17 अक्तूबर से शुरू होने जा रहा है। तिथियों की घटत-बढ़त के कारण नवरात्र नौ की जगह आठ दिन का होगा। इस बार चार सर्वार्थ सिद्धि के दुर्लभ संयोगों की जोड़ी पर्व को खास बना रही है। इसी के साथ मांगलिक कार्यों और खरीदारी की भी शुरूआत हो जाएगी।
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वेद-पुराणों में मां दुर्गा को शक्ति का रूप माना गया है, जो असुरों से इस संसार की रक्षा करती है। नवरात्र में शक्ति के नौ रूपों की उपासना की जाती है। हालांकि महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती को देवी का मुख्य रूप बताया गया है। 16 अक्तूबर को अधिक मास की अमावस्या होगी। इसी दिन अधिक मास खत्म होगा। 17 अक्तूबर को देवी की भक्ति और उपासना का पर्व शारदीय नवरात्र शुरू होगा। 17, 19, 23 और 24 अक्तूबर को सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग पर्व को खास बना रहा है।
इस बार नवरात्र आठ दिन का होगा। इस बार अष्टमी और नवमी तिथि एक साथ पड़ रही है। 24 अक्तूबर को सुबह 6.58 बजे तक अष्टमी है और उसके बाद नवमी लग जाएगी। ऐसे में कन्या पूजन 24 अक्तूबर को ही होगा। 25 अक्तूबर को नवमी तिथि पर मध्याह्न काल में दशहरा पूजन किया जाएगा। ज्योतिषाचार्य उदय शंकर भट्ट और मोहित उनियाल ने बताया कि आदिशक्ति इस सृष्टि का संचालन करती है। शारदीय नवरात्र में देवी की पूजा, आराधना वैभव और भोग प्रदान करने वाला होता है। ऋतुओं का संधिकाल होने के कारण इस दौरान जड़ी-बूटियों और गोघृत से किया गया हवन मन और शरीर को पुष्ट करने वाला होता है। घट स्थापना का शुभ मुहूर्त नवरात्र के प्रथम दिन सुबह 6.23 बजे से 10.12 बजे तक है। घट स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.44 बजे से दोपहर 12.29 बजे तक रहेगा।
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