आम आदमी और कामगार मजदूरों के लिए सरकार की ओर से संचालित योजनाओं को क्रियान्वयन को श्रम विभाग के पास अधिकारी-कर्मचारियों को टोटा बना हुआ है। तीन साल से श्रम विभाग एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के भरोसे चल रहा है। श्रम प्रवर्तन अधिकारी भी चार्ज पर हैं। उनके पास देहरादून और उत्तरकाशी की भी जिम्मेदारी है।
पूर्व में श्रम विभाग केवल बाल श्रम रोकने को काम करता था। तब दो-तीन जिलों में एक अधिकारी को ही जिम्मेदारी सौंपी जाती थी, लेकिन अब श्रम विभाग के पास सन्निर्माण कर्मकार बोर्ड को भी शामिल कर लिया गया है। केंद्र और राज्य सरकार की करीब 14 जन कल्याणकारी योजनाएं शामिल की गई है। जिले की स्थिति और भी दयनीय है। तीन साल से विभाग बिना लिपिक के संचालित हो रहा है। मात्र एक अनुसेवक के भरोसे ही पूरा कार्यालय चल रहा है। श्रम प्रवर्तन अधिकारी एसएस रांगड़ का भी 2019 में स्थानांतरण कर दिया गया। उन्हें उत्तरकाशी और देहरादून की जिम्मेदारी दी थी। बावजूद अधिकारी न मिलने पर उन्हें ही फिर से टिहरी का अतिरिक्त काम दिया गया है। उन्होंने बताया कि 2016 में जब उन्होंने चार्ज लिया था, तब विभिन्न योजनाओं में 500 लोगों का पंजीकरण था। वर्तमान में 15238 लोगों का पंजीकरण हो चुका है। करीब 6500 लोगों को योजनाओं का भी लाभ मिल चुका है।