जौनपुर क्षेत्र में पौराणिक दुबड़ी का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। यह त्योहार क्षेत्र की सुख समृद्धि और फसल की अच्छी पैदावार के लिए बड़े उत्साह से मनाया जाता है। महिलाओं ने आंगन में दुबड़ी (फसल गठड़ी) की पूजा कर त्योहार का शुभारंभ किया।
जौनपुर क्षेत्र के ग्राम मोगी, मरोड़, खैराड़, सैंदूल, टटोर, ललोटना, बंगसील सहित पूरे जौनपुर में दुबड़ी का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। क्षेत्र की खुशहाली से जुड़े इस त्योहार पर शोध करने के लिए डायट के शोधार्थियों ने सेंदुल गांव पहुंचकर दुबड़ी को मनाने का कारण, पकाए जाने वाले पकवानों की जानकारी ली।
ग्रामीण बृहस्पतिवार को पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ नृत्य कर देर रात तक झूमते रहे। डायट की टीम के सदस्यों ने सेंदुल, म्याणी, मौगी, घियाकोटी आदि गांवों का भ्रमण किया। टीम में कैलाश डंगवाल, डा. वीर सिंह रावत, दीपक रतूड़ी, डीएस भंडारी, शुभराज सिंह नेगी, मनोज बहुगुणा, अरुणा फारुखी, राकेश जौनपुरी, राजेंद्र पंवार और अमित सजवाण आदि शामिल थे।
दुबड़ी का त्यौहार बड़ा रोमांचक रहता है। गांव की महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में आरती की थाल से दुबड़ी के पुतले की पूजा करते हैं। उसके बाद पुरुष दुबड़ी के पुतले को उखाड़ने के लिए जोर आजमाइश करते हैं। पुतला उखड़ने पर ढोल दमाऊं और रणसिंगे की ताल पर तांदी, मंडाण और लोकगीत गाए जाते हैं।