नवरात्र के अष्टमी तिथि पर मां सुरकंडा की डोली की विदाई के लिए जड़धार गांव के ग्रामीण कलेऊ और अन्य तैयारियों में जुट गए हैं। इसके लिए किसी घर में अरसा और रोट बनाए जा रहे हैं, तो कहीं स्वांले और प्रसाद बनाया जा रहा है।
बुधवार को भी जड़धार गांव में सिद्धपीठ मां सुरकंडा की डोली के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। साथ ही गांव स्थित देवी के मंदिर में हवन-पूजन कार्यक्रम के बाद पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चारण किया। अब बृहस्पतिवार को अष्टमी तिथि पर सुरकंडा देवी की डोली मंदिर लौट जाएगी।
देवी को विदा करने के लिए गांव का हर ग्रामीण अपने घर में कुछ न कुछ पकवान बनाने की तैयारियों में लग गया है। कलेउ में ग्रामीण रोट, अरसा, हलवा बना रहे हैं, तो साथ ही चावल, दाल और अन्य खाद्यान्न का पैकेट भी तैयार किया जा रहा है। प्रधान रेखा जड़धारी ने बताया कि देवी की विदाई के लिए पंचायत के साथ ही ग्रामीण कलेउ बना रहे हैं। बताया कि सुबह 11 बजे डोली को मंदिर में ले जाने के लिए युवकों को चयनित कर लिया गया है।