चमोली जिले के रैणी-तपोवन में आई आपदा के बाद एक बार फिर से जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण के विरोध में लोग मुखर होने लगे हैं। पर्यावरणविदें सहित वैज्ञानिकों ने भी बड़े बांधों को हिमालयी क्षेत्रों के लिए खतरनाक बताया है। रानीगढ़ मंदिर परिसर में हुई जनप्रतिनिधियों की बैठक में भिलंगना नदी पर बनाए जा रहे पॉवर प्रोजेक्ट पर रोक लगाने की मांग की गई।
शुक्रवार को भिलंगना ब्लाक के रानीगढ़ मंदिर परिसर में समण गांव के प्रधान गोवर्द्धन प्रसाद की अध्यक्षता में हुई बैठक में भिलंगना में बनाए जा रहे पॉवर प्रोजेक्ट पर चर्चा की गई। पॉवर प्रोजेक्ट को विनाशकारी बताते हुए उस पर रोक लगाने की मांग की गई। इस दौरान भिलंगना घाटी जल-जंगल-जमीन बचाओ संघर्ष समिति का गठन किया गया। समिति में भजन सिंह रावत को अध्यक्ष, नित्यानंद कोठियाल को सचिव, मदन राणा सह सचिव, विनोद रावत कोषाध्यक्ष, राजेंद्र गुसाईं को सलाहकार और विनोद बडोनी, उत्तम सिंह रावत, धर्मवीर पंवार को सदस्य बनाया गया। बैठक में अर्जुन सिंह, पवन राणा, मायाराम, बालकराम, कुंवर भंडारी, दीपक पैन्यूली, भगवान सेमवाल, मनोज नेगी, विजय भंडारी, जसवीर रौतेला, चंद्रभूषण, सुंदर सिंह रावत, भाग सिंह, धर्म सिंह नेगी, लक्ष्मी, मायाराम मिश्रा, नरेंद्र सिंह, अव्वल लाल, भूपेंद्र राणा, शिवराम और प्रमोद सिंह आदि शामिल थे।
एक सप्ताह में मांगी जानकारी
- बैठक के बाद समिति ने एसडीएम घनसाली को ज्ञापन देकर पॉवर प्रोजेक्ट पर रोक लगाने, परियोजनाओं की डीपीआर, पर्यावरण जांच रिपोर्ट, परियोजना से संबंधित जन सुनवाई की रिपोर्ट, प्रभावित ग्राम पंचायतों से एनओसी की जानकारी देने की मांग की। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह में जानकारी नहीं दी गई तो आगे की रणनीति बनाई जाएगी।