लंबे इंतजार के बाद श्रीदेव सुमन विवि में पहली बार प्री पीएचडी शुरू हो गया है। इसके लिए विवि ने आठ अध्ययन केंद्र बनाए हैं। जहां पर छात्र छह माह प्री पीएचडी करेंगे। उसके बाद शोध कार्य करने के लिए विवि ने गढ़वाल मंडल के 12 राजकीय महाविद्यालयों को शोध केंद्र बनाया है।
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पीएचडी कराने के लिए विवि ने महाविद्यालयों को सीटों का आवंटन किया है। विवि स्थापना के 13 साल बाद प्री पीएचडी और पीएचडी की सुविधा मिलने से युवा उत्साहित हैं। श्रीदेव सुमन विवि में इस वर्ष से प्री पीएचडी शुरू हो गया है। छह माह का प्री पीएचडी कराने के लिए विवि ने ऋषिकेश कैंपस, राजकीय महाविद्यालय कोटद्वार, गोपेश्वर, कर्णप्रयाग, डोईवाला, नई टिहरी और डाकपत्थर महाविद्यालय को अध्ययन केंद्र बनाया है
20 विषयों में विवि ने प्री पीएचडी कराने का निर्णय लिया था, लेकिन संस्कृत और भू-गर्भ विज्ञान विषय में प्री पीएचडी करने लिए किसी भी छात्र ने आवेदन नहीं किया। ऐसी स्थिति में अब 18 विषयों में इस माह प्री पीएचडी में 215 छात्रों ने प्रवेश लिया है, जिसमें सर्वाधिक 65 अभ्यार्थियोें ने विवि के ऋषिकेश कैंपस में दाखिला लिया है।
कुलपति प्रो. एनके जोशी ने बताया कि छह माह की प्री पीएचडी पूरी होने के बाद शोध कार्य करने के लिए विवि ने गढ़वाल मंडल के 12 राजकीय महाविद्यालयों को शोध केंद्र बनाया है। उन्होंने बताया कि ऋषिकेश कैंपस, डोईवाला, रायपुर, डाकपत्थर, नई टिहरी, उत्तरकाशी, अगस्त्यमुनि, कर्णप्रयाग और जयहरीखाल महाविद्यालय का चयन शोध केंद्र के रूप में किया गया है।