अभियुक्त हरिओम के खिलाफ 15 अगस्त 2018 को थत्यूड़ पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। शिक्षक के सभी दस्तावेजों की जांच के बाद पुलिस ने सभी प्रमाणपत्रों की जांच कर 10 दिसंबर 2018 को आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/अपर सीनियर सिविल जज ने कूट रचित दस्तावेजों का प्रयोग कर शिक्षक की नौकरी हासिल करने और पेंशन लेने के अभियुक्त को सात साल का कठोर कारावास और 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर अभियुक्त को दो माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
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सहायक अभियोजन अधिकारी अजय रावत ने बताया कि सीईओ ने अख्तर हसनैन रिजवी, वारसी गली नंबर -5 सिविल लाइंस मुरादाबाद के शिकायती पत्र पर वर्ष 2018 में शिक्षक हरिओम सिंह निवासी ग्राम रामपुर पोस्ट आफिस सिकंदपुर, तहसील चांदपुर थाना शिवाली कलां जिला बिजनौर यूपी के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच कराई थी।
शिकायत के आधार पर शिक्षक हरिओम के शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया गया। जांच में शैक्षिक प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। इस आधार पर अभियुक्त हरिओम के खिलाफ 15 अगस्त 2018 को थत्यूड़ पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
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शिक्षक के सभी दस्तावेजों की जांच के बाद पुलिस ने सभी प्रमाणपत्रों की जांच कर 10 दिसंबर 2018 को आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सहायक अभियोजन अधिकारी ने प्रमाणपत्रों की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि अभियुक्त ने कूट रचित दस्तावेजों का प्रयोग कर 12 दिसंबर 1990 में शिक्षा विभाग में नौकरी हासिल की।
इस दौरान उसने पूरे सेवाकाल में वेतन प्राप्त करता रहा और सेवानिवृत्ति का लाभ भी प्राप्त किया। अभियुक्त का कृत्य कठोर दंड दिए जाने योग्य है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/अपर सीनियर सिविल जज अविनाश कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शिक्षक हरिओम को दोष सिद्ध पाते हुए सात साल का कठोर कारावास, 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।