कद्दूखाल-सुरकंडा देवी रोपवे के निर्माण के नाम पर कार्यदायी संस्था अभी तक मिट्टी परीक्षण भी पूरा नहीं कर पाई है। जबकि अक्तूबर में रोपवे का शिलान्यास हो गया था। शिलान्यास के दौरान रोपवे प्रोजेक्ट कंपनी ने तत्काल कार्य शुरू करने के दावे कर एक साल में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा था।
बावजूद रोपवे के लिए बनाए जाने वाले टावरों के लिए केवल छह स्थानों पर ही मिट्टी के नमूने ले पाई है। जबकि तीन और टावरों के लिए परीक्षण किया जाना बाकी है। मिट्टी के नमूने लेने के बाद परीक्षण को प्रयोगशाला भेजा जाएगा। प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने के बाद ही विधिवत रूप से निर्माण कार्य शुरू हो पाएगा।
सिद्धपीठ सुरकंडा देवी मंदिर तक पहुंचने के लिए पर्यटन विभाग ने 13 करोड़ की लागत से रोपवे की स्वीकृति देकर पीपीपी मोड़ पर बनाने का निर्णय लिया था। 25 अक्तूबर को सीएम हरीश रावत एवं पर्यटन मंत्री दिनेश धनै ने इसका शिलान्यास किया था। करीब पांच सौ मीटर स्पीड़ रोपवे के निर्माण से माता सुरकंडा के दर्शन को जाने वाले पर्यटकों को दो किमी की पैदल दूरी से निजात मिलनी है। शिलान्यास के दिन रोवपे निर्माण करने वाली सुरकंडा रोपवे प्रोजेक्ट कंपनी ने तत्काल निर्माण शुरू कर एक साल के अंदर इसका संचालन का भरोसा दिया था।
रोपवे निर्माण को पर्यावरणीय अनुमति भी पहले ली जा चुकी है। लेकिन प्रोजेक्ट कंपनी की धीमी गति से पांच माह में मिट्टी परीक्षण का कार्य ही पूरा नहीं हो पाया है। अभी तक क्रेन को छींचने को बनने वाले नौ टावरों में से छह टावरों की मिट्टी के नमूने लिए गए हैं। शेष तीन टावरों के नमूने लिए जाने बाकी है। सभी नौ नमूने लेने के बाद उन्हें तकनीकी परीक्षण को प्रयोगशाला भेजा जाएगा। प्रयोगशाला से रिपोर्ट मिलने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू होंगे सकेगा। ऐसे में जब पांच माह में केवल टेस्टिंग तक पूरी नहीं हो पाई, तो एक साल के अंदर रोपवे का निर्माण पूरा होने के दावे जमीन पर उतरने संभव नहीं दिख रहे हैं।
रोपवे के टावर निर्माण हेतु मिट्टी के नमूूने लिए जा रहे हैं। जब तक मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट आती है, तब तक पेड़ों का छपान किया जाएगा। तय समय पर रोपवे निर्माण हो जाएगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है। इसके लिए संबंधी प्रोजेक्ट कंपनी से समन्वय बनाया जा रहा है। - सोबत सिंह राणा, जिला पर्यटन अधिकारी टिहरी।