आपदा प्रभावित सिल्यारा गांव के लोगों की दिनचर्या नौ दिन बाद भी सामान्य नहीं हो पाई है। हालांकि आंशिक तौर पर प्रभावित लोगों ने अपने घरों में घुसे मलबे को हटाना शुरू कर दिया। लेकिन प्रशासन की ओर से मनरेगा योजना से मलबा हटाने का काम अभी शुरू नहीं हो पाया है।
केमर घाटी में आपदा की जद में आए सिल्यारा गांव के करीब तीन दर्जन परिवारों के घर मलबे में जमींदोज हो गए थे। परिवारों की जिंदगी अभी तक पटरी पर नहीं लौट पाई है। गांव की ममता देवी, रीना देवी, आभा देवी, लक्ष्मी देवी, आशा देवी, धन सिंह आदि कहते हैं कि घरों में कई फीट मलबा जमा है। जिसे हटाने के लिए प्रशासन कोई मदद नहीं कर रहा, लिहाजा स्वयं ही मलबा हटाने में जुट गए हैं।
मुख्यमंत्री ने गांव में आकर प्रशासन को मनरेगा योजना से मलबा हटाने के लिए लोनिवि को निर्देश दिए थे, लेकिन अभी तक दोनों कार्य शुरू नहीं हो पाए। लोगों की माने तो घनसाली-सिल्यारा गांव के बीच में नागराजा देवता के मंदिर की वजह से गांव में कोई जनहानि नहीं हुई। मंदिर परिसर में काफी मलबा भरने और उसके सीधे गांव तक पहुंचने में हुई देरी के चलते ग्रामीणों को जान बचाकर घरों से भागने का मौका मिल गया। ग्रामीण घरों के साथ ही मंदिर के आसपास जमा मलबे की सफाई की बात कर रहे हैं। भिलंगना के बीडीओ बिजेंद्र रिंगोड़ी ने बताया कि मनरेगा के तहत होने वाले निर्माण कार्यों के लिए ग्राम पंचायतों को स्वीकृति दे दी गई है। इसके तहत घरों में घुसा मलबा हटाने का काम नहीं है।