पुल निर्माण और स्कूल में शिक्षक तैनाती की मांग को लेकर पिछले 10 दिनों से अनशन पर बैठे पिंस्वाड़ गांव के लोगों के आगे जिला प्रशासन को आखिरकार झुकना ही पड़ा। जिला प्रशासन की ओर से पुल निर्माण के लिए लोनिवि को पांच लाख की धनराशि देने और स्कूल में दो शिक्षकों के कार्यभार ग्रहण करने के बाद ग्रामीणों ने मंगलवार को अनशन तोड़ दिया है। एडीएम जगदीश लाल ने अनशनकारियों को जूस पिलाया।
पिंस्वाड़ गांव को जोड़ने वाला झाला पैदल पुल वर्ष 2013 की आपदा में बह गया था। तब से ग्रामीण गदेरे को लकड़ी के बल्लियों के सहारे आरपार कर रहे थे। पुल निर्माण और दो शिक्षकों की तैनाती की मांग को लेकर पिंस्वाड़ के लोग 25 मार्च से झाला में आंदोलनरत थे। 27 मार्च से पिंस्वाड़ गांव के गबर सिंह, शिवराज सिंह, सौणियां सिंह, भरत सिंह, सुरेंद्र पंवार, सुरती देवी और कौंरी देवी ने अनशन पर बैठी हुई थी।
मंगलवार को बूढ़ाकेदार के सीआरसी रामानुज बहुगुणा और रग्स्या के बीआरसी महेंद्र कुमार ने पिंस्वाड़ जूनियर हाईस्कूल पहुंचकर कार्यभार ग्रहण किया। एडीएम जगदीश लाल, एसडीएम देवानंद शर्मा, लोनिवि के ईई डीएल वर्मा वार्ता के लिए झाला पहुंचे।
उन्होंने बताया कि पुल निर्माण के लिए लोनिवि को पांच लाख दे दिया है। एक माह के भीतर पुल बनकर तैयार हो जाएगा। इस पर अनशनकारी माने। बाद में अनशनकारियों को बेलेश्वर अस्पताल में भर्ती किया गया। इस मौके पर पूर्व प्रधान धर्म सिंह जखेड़ी, पूर्व प्रमुख धनी लाल शाह, प्रेम लाल त्रिकोटिया, शक्तिलाल शाह, चंद्र किशोर मैठाणी, शूरवीर लाल, धूम सिंह जखेड़ी आदि उपस्थित थे।