आपदा के दो साल बाद भी बागी गांव के पीड़ितों का पुनर्वास नहीं हो पाया है। पीड़ितों ने सरकार से शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की है। विकासखंड चंबा के बागी गांव में 15 अगस्त 2014 को बादल फटने से 18 भवन जमींजोद हो गए थे।
तब प्रशासन ने सभी पीड़ितों को निकट के राजकीय इंटर कालेज में शरण देकर राहत के रूप में 1-1 लाख रुपये दिए थे, जिस पर पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से सिर ढकने के लिए शीघ्र पुनर्वास की मांग की थी। तब प्रशासन ने सौड़ नामे तोक में जमीन देने की बात कही, लेकिन ग्रामीणों ने भूगर्भीय सर्वेक्षण से पहले जमीन लेने से इंकार कर दिया।
कुछ पीड़ितों का तर्क था कि जमीन भी भूगर्भीय हिसाब से संवेदनशील हो सकती है। ऐसे में आपदा में सब कुछ गंवा देने वाले पीड़ित परिवार रिश्तेदारों और परिजनों के यहां शरण लिए हुए हैं। पीड़ितों की माली हालत को देखते हुए कुछ माह बाद हंस फाउंडेशन ने भी हाथ बढ़ाते हुए 50-50 हजार रुपये की आर्थिक मदद की थी।
चैतराम बिजल्वाण का कहना है कि पीड़ित परिवारों ने भूगर्भीय सर्वेक्षण के बाद ही जमीन लेने की बात कही थी, लेकिन आज तक जमीन की जांच नहीं होने के कारण विस्थापन का मामला अटका पड़ा है। बताया कि आपदा में सब कुछ गंवाने वाले एक पीड़ित को दो कमरों की जमीन ही उपलब्ध हो पाई है।