मंगशीर बग्वाल के लिए इस तरह सजाया जा रहा है बाबा बूढ़ाकेदार और गुरु कैलापीर देवता का मंदिर। स्र
नई टिहरी। बूढ़ाकेदार क्षेत्र में मंगशीर की दिवाली (बग्वाल) 29 और 30 नवंबर को धूमधाम से मनाने की तैयारियां जोरशोर से शुरू हो गई है। मंगशीर की बग्वाल मनाने के लिए बाहर प्रदेशों में नौकरी करने गए लोग परिवार सहित अपने घरों को लौटने लगे गए हैं। बूढ़ाकेदार मंदिर समिति की ओर से बाबा बूढ़ाकेदार और गुरु कैलापीर देवता के मंदिरों को भव्य तरीके से सजाया जा रहा है।
टिहरी जिले के बूढ़ाकेदार क्षेत्र में मनाई जाने वाले मंगशीर की छोटी बग्वाल 29 और बड़ी 30 नवंबर को मनाई जाएगी। बड़ी बग्वाल पर इस बार बूढ़ाकेदार कस्बे में सामूहिक भैलों खेलने का कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जिसके लिए ग्रामीण भैला तैयार करने में जुटे हैं। बूढ़ाकेदार मंदिर समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह नेगी, गोपेश्वर प्रसाद जोशी, ऋषभदेव बहुगुणा ने बताया कि मंगशीर की बग्वाल मनाने के लिए बूढ़ाकेदार क्षेत्र के लोग परिवार सहित अपने घरों के लिए लौटने लगे हैं।
देश में कार्तिक माह की दीपावली धूमधाम से मनाई जाती है, लेकिन बूढ़ाकेदार क्षेत्र के थाती कठूड पट्टी तथा टिहरी जिले से सटे उत्तरकाशी जिले की नैल्ड कठूड़ और गाजणा कठूड़ पट्टी के साथ नैनबाग क्षेत्र के कई गांवों में भी मंगशीर की बग्वाल मनाई जाती है। बूढ़ाकेदार क्षेत्र में मंगशीर की बग्वाल दो दिन तक मनाई जाती है।
बड़ी बग्वाल मनाने के अगले दिन 1 दिसबंर से तीन दिवसीय गुरु कैलापीर मेला शुरू होगा। मेला शुरू होन से पूर्व तड़के से श्रद्धालु बाबा बूढ़ाकेदार और गुरु कैलापीर देवता के दर्शन और पूजन के लिए मंदिर पहुंचते हैं। पूजा-अर्चना के बाद कई जोड़ी ढोल-दमाऊं की ताल और पौराणिक वाद्ययंत्र रणसिंगा की गूंज के साथ गुरु कैलापीर देवता के निशान को मंदिर से बाहर लाया जाता है।
गुरु कैलापीर के पश्वा देवता के निशान को कंधे पर उठाकर खेतों की ओर दौड़ लगा देता है। देवता के निशान के पीछे सैकड़ों के संख्या में लोग भी दौड़ लगाते हैं, जिसके बाद तीन दिवसीय गुरु कैलापीर मेले का विधिवत शुभारंभ होता है। मंदिर समिति के अध्यक्ष नेगी ने बताया कि सांस्कृतिक टीमों, स्थानीय गायकों और कलाकारों को भी मेले में आमंत्रित किया गया है।