आखिरकार 10 साल बाद पालीटेक्निक भवन निर्माण के लिए भूमि की तलाश पूरी हो गई है। जिला प्रशासन ने बालमा गांव में 2.706 हेक्टेयर भूमि कालेज प्रबंधन के नाम कर दी है। इससे पालीटेक्निक को अपने भवन और मान्यता को लेकर लटक रही एआईसीटीई की तलवार से भी छुटकारा मिलेगा। भवन निर्माण के लिए नाबार्ड से पांच करोड़ रुपये स्वीकृत है, लेकिन जमीन नहीं होने से निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा था।
नई टिहरी पालीटेक्निक को वर्ष 2006 में स्वीकृति मिली थी, जिसमें इलेक्ट्रिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स व सिविल ट्रेड संचालित होने थे। पहले तीन साल तक पालीटेक्निक नरेंद्रनगर के साथ ही संचालित होता रहा। 11 अगस्त 2011 में नरेंद्रनगर से पालीटेक्निक को चंबा में पुराने राजकीय महाविद्यालय के भवन पर शिफ्ट किया गया। जहां सिर्फ इलेक्ट्रिकल्स ट्रेड ही संचालित किया गया। चंबा बादशाहीथौल भवन पर श्रीदेव सुमन विवि खुलने पर पालीटेक्निक को 19 सितंबर 2013 को प्रताप इंटर कालेज बौराड़ी शिफ्ट कर दिया गया। पीआईसी के भवन पर पालीटेक्निक को 13 कमरे आवंटित किए गए हैं। संस्थान में वर्तमान में 109 अभ्यर्थी अध्ययनरत हैं। जिला प्रशासन ने आखिरकार 10 साल बाद बालमा गांव में पालीटेक्निक भवन के लिए एआईसीटीई के मानक के अनुसार 2.706 हेक्टेयर राजस्व भूमि 15 जनवरी को कालेज प्रबंधन को उपलब्ध करवा दी है। भूमि मिलने के बाद अब भवन निर्माण की उम्मीद जगी है।
कोट
जिला प्रशासन से 2.706 हेक्टेयर मिल चुकी है। अब पालीटेक्निक के भवन निर्माण की कार्रवाई जल्द शुरू होगी। नाबार्ड से भवन निर्माण के लिए बजट पहले ही स्वीकृत है। भवन बनने के बाद स्वीकृत अन्य ट्रेडों में भी कक्षाएं शुरू हो सकेगी।
-गौतम अग्रवाल, प्रधानाचार्य, पालीटेक्निक नई टिहरी।