शासन-प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली के चलते स्वीकृति के छह साल में भी राजकीय पालीटेक्निक ओखलाखाल का भवन निर्माण पूरा नहीं हो पाया है, जिससे छात्र-छात्राएं राजकीय इंटर कालेज के दो कमरों में पढ़ने को मजबूर हैं।
सरकार ने वर्ष 2013 में प्रतापनगर के ओखलाखाल में पालीटेक्निक की स्थापना की थी। प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था पर राजकीय इंटर कालेज के चार कमरे पालीटेक्निक के लिए उपलब्ध करवाए थे। साथ ही निर्माण को तीन करोड़ 30 लाख की भी स्वीकृति दी थी, लेकिन भवन निर्माण को चिह्नित स्थल पर एप्रोज मार्ग समेत भूमि संबंधी प्रक्रिया पूरी न होने के चलते बमुश्किल 2016 में निर्माण कार्य शुरू हुआ। बावजूद निर्माण की धीमी गति और शासन से स्वीकृत धनराशि की किश्त समय-समय पर न मिलने से कार्य पूर्ण नहीं हो पाया। वर्तमान में तीन मंजिला भवन की छत तो पड़ गई है। निर्माण पर अब तक दो करोड़ 60 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। 75 लाख अभी कार्यदायी संस्था के पास अवशेष है, जिससे दो मंजिला ही तैयार हो पाएगा। अन्य कार्यों को पूरा करवाने को 82 लाख रुपये की और जरूरत है। भवन नहीं होने से पालीटेक्निक की तीन कक्षाएं दो कमरों में चल रही है। पालीटेक्निक के सिविल इंजीनियरिंग में 60 छात्र-छात्राएं सुविधाओं के अभाव में पढ़ने को मजबूर हैं।
आगणन 2013 में बन गया था, लेकिन पैसा बहुत बाद में मिला है। इससे निर्माण कार्य में देरी हुई है। इस दौरान बनाए गए आगणन बिजली, पानी, सीवर, रेनवाटर हार्वेस्टिंग का प्राविधान नहीं किया गया है। निर्माण पूरा करवाने को 82 लाख का आगणन शासन को भेजा गया है।
-अमर ज्योति डोबरियाल, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट पेयजल निर्माण निगम चंबा।
लंबे समय बाद भी भवन नहीं होने से पठन-पाठन में दिक्कत हो रही है। कार्यदायी ने निर्माण कार्य में देरी की है। भवन के प्रथम तल भी तैयार हो जाता, तो छात्रों को काफी सुविधा मिल सकती थी।
-हुकम चंद, प्रधानाचार्य, राजकीय पालीटेक्निक ओखलाखाल।