हादसे में बौंसाल गांव में खीमानंद नौटियाल के घर का इकलौता चिराग अमन बुझ गया। अमन ने हादसे से कुछ मिनट पहले ही अपनी मां को फोन कर जल्द ही घर पहुंचने की सूचना दी थी, लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था। अब अमन की मौत से परिवार में कोहराम मचा है।
बनना चाहता था इंजीनियर
बौंसाल गांव निवासी खीमानंद नौटियाल का बेटा अमन (18) देहरादून में इंजीनियरिंग की कोचिंग करता था। पंडिताई कर खीमानंद के आंखों में घर के एक मात्र चिराग अमन को इंजीनियर बनाने की चाहत थी। अमन की बड़ी बहन मनीषा की शादी नवंबर में होनी है। छोटी बहन अनीषा पढ़ाई करती है।
बहन की शादी की बात करने आया था
बहन की शादी की बातचीत करने ही अमन शनिवार को देहरादून से अपने ताऊ के घर चमियाला पहुंच गया था। रविवार को वह चमियाला से अपने घर बौंसाल आ रहा था। घनसाली पहुंचने से पहले उसने अपनी मां संगीता को फोन पर सूचना दी कि वह अग्यारा बैंड पहुंच गया है और एक घंटे में घर पहुंच रहा है।
मां को कुशल होने की सूचना देने के मात्र पांच मिनट बाद जिस वाहन में वह सवार था वह गैस गोदाम के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
घनसाली में वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना पाकर मां ने दोबारा फोन किया, तो अमन हमेशा की लिए खामोश हो गया था। नाते-रिश्तेदार दुर्घटनाग्रस्त स्थान की ओर दौड़ पडे़। घटना के काफी देर बाद अमन का शव नदी से बरामद किया गया।