उत्तराखंड में दो दशक से अधिक समय से लगातार आ रहे भूकंप से देवभूमि दहशत में है, जिसकी रिक्टर स्केल पर जांच के लिए केंद्र सरकार ने गढ़वाल मंडल के तीन जिलों में दस सिस्मोग्राफी मशीनें स्थापित कर दी हैं। जिसका जिम्मा हैदराबाद की संस्था नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट को दिया गया है।
इसमें से संस्था की ओर से एक मशीन बाल गंगा महाविद्यालय घनसाली में भी स्थापित की गई है, जिससे क्षेत्र में आने वाले भूकंप की तीव्रता व ऐपी सेंटर की जानकारी मिल सकेगी।
टिहरी जिले का भिलंगना ब्लॉक लंबे समय से प्राकृतिक आपदाओं की मार झेलता रहा है। वर्ष 1991 में पहली बार भिलंगना क्षेत्र में 6.4 रिक्टर भूकंप आया था। तब क्षेत्र में भारी जनधन की हानि हुई थी। वर्ष 1994 से यहां हर साल भूकंप के झटके आते हैं। इसके बाद सरकार की ओर से क्षेत्र में भू-वैज्ञानिकों व भूगोलवेत्ताओं से सर्वे के साथ शोध कराया गया। इनकी रिपोर्ट के बाद पूरे भिलंगना क्षेत्र को भूकंप की दृष्टि व दैवी आपदाओं की संवेदनशीलता को देखते हुए जोन पांच में रखा गया है।
वैसे तो वाडिया इंस्टीट्यूट की ओर से घनसाली के कोपडधार में क्षेत्र आ रहे भूकंप के झटकों को मापने के लिए भूकंप वैधशाला सात वर्ष पूर्व स्थापित की गई है, लेकिन उसकी कनेक्टिविटी देहरादून से होने के कारण स्थानीय स्तर पर उसकी कोई जानकारी नहीं मिल पाती है।
हाल में रुद्रप्रयाग जिले में आए भूकंप के बाद केंद्र सरकार ने हैदराबाद की नेशनल ज्योफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट को गढ़वाल मंडल में भूकंप की तीव्रता मापने के लिए चमोली, रुद्रप्रयाग व टिहरी के घनसाली समेत दस सिस्मोंग्राफी मशीनें लगा दी हैं।
संस्था की ओर से बालगंगा महाविद्यालय में लगाई गई मशीन आठ माह तक का डेटा रिजर्व रखेगी। मशीन लगने के बाद अब क्षेत्र के लोगों को जल्दी से पता लग जाएगा। क्षेत्र के किस भाग में भूकंप का केंद्र था व उसकी तीव्रता की भी जानकारी मिल सकेगी।
संस्था के वैज्ञानिक सतीश शाह ने इसकी पुष्टि की है। बताया कि केंद्र सरकार द्वारा यह कार्य संस्था को सौंपा गया है, जिसके तहत समूचे क्षेत्र में 10 मशीनें लगाई गई हैं।