टिहरी झील विशेष क्षेत्र पर्यटन विकास प्राधिकरण को झील क्षेत्र के आसपास के 98 गांवों में सुनियोजित विकास को अनुमति मिल गई है। अब प्राधिकरण की अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति व्यवसायिक भवन निर्माण से लेकर, खनन और कोई भी निर्माण नहीं कर पाएगा।
टिहरी बांध की झील बनने के कारण झील क्षेत्र के आसपास के गांवों के सुनियोजित विकास के लिए प्राधिकरण का गठन और मास्टर प्लान की मांग चल रही थी। इससे अवैध अतिक्रमण, भवन निर्माण, खनन आदि पर रोक लगने के साथ ही पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार ने 2013 में टिहरी झील विशेष क्षेत्र पर्यटन विकास प्राधिकरण का गठन किया था।
प्राधिकरण ने भी क्षेत्र के नई टिहरी, चंबा शहर समेत 232 गांवों को इसमें शामिल कर सरकार से अधिकार मांगे थे। शासन ने हाल ही में भागीरथी घाटी के चिन्यालीसौड़ से लेकर भिलंगना घाटी के पिलखी तक 98 गांवों को प्राधिकरण की सीमा में शामिल कर दिया है। अब दोनों घाटियों के आसपास व्यवसायिक, सरकारी भवन निर्माण, पर्यटन गतिविधियां, विभिन्न विकास योजनाओं, खनन की अनुमति प्राधिकरण से लेनी होगी।
इसके लिए भवन के मानचित्र के आधार पर भवन निर्माण उपविधि 2013 के अनुसार शुल्क भी जमा करना पड़ेगा। प्राधिकरण के विधि सलाहकार देवेंद्र दुमोगा ने बताया कि मास्टर प्लान भी जल्द बनकर तैयार हो जाएगा। बिना अनुमति के व्यवसायिक समेत अन्य निर्माण नहीं हो पाएंगे।
तीन साल से पास नहीं हो रहे नक्शे
नई टिहरी। भले ही 98 गांवों को प्राधिकरण के अधीन शामिल कर दिया गया है, लेकिन नई टिहरी, चंबा शहर के इसमें शामिल नहीं होने से नगरवासियों की मुश्किलें कम नहीं हो रही है। सरकार ने शहर के नियोजित विकास के लिए नियत प्राधिकरण बनाया था, लेकिन अप्रैल 2013 में इसे समाप्त कर दिया था, इससे नई टिहरी और चंबा शहर में नक्शे पास नहीं हो रहे हैं।
नक्शे पास नहीं होने से लोग मनमाने ढंग से भवन निर्माण कर रहे हैं, वहीं बिना नक्शे पास किए लोगों के बैंक ऋण भी पास नहीं हो रहे हैं। भवन निर्माण को ऋण नहीं मिलने से दोनों नगरों के लोगों को दिक्कतें उठानी पड़ रही है। साथ ही सरकारी भूमि पर लगातार अवैध कब्जे भी हो रहे हैं।
पहले नियत प्राधिकरण अतिक्रमण रोककर नक्शा पास करता था। नगरक्षेत्र की जमीन का अधिकार नगर पालिका के पास नहीं है। वहां भूमि का स्वामित्व पुनर्वास निदेशालय के अधीन है।