चंबा-मसूरी फलपट्टी और हेंवल घाटी के काश्तकार बारिश के लिए इंद्रदेव की ओर टकटकी लगाए हुए हैं। बारिश नहीं होने के कारण किसान गेहूं, मसूर, जौ, मटर की बुआई समय पर नहीं हो पाई है। आलम यह है कि खेतों के मिट्टी की नमी गायब हो जाने से 50 प्रतिशत से अधिक फसल चौपट हो गई है।
मौसम की बेरुखी से चंबा-मसूरी फलपट्टी और खाड़ी क्षेत्र के काश्तकारों की मुसीबत बढ़ गई है। दिसंबर का महीना गुजरने को है, लेकिन अभी तक बारिश नहीं होने से किसानों की माथे पर चिंता की लकीरें पड़ गई हैं। इंद्रदेव के रूठ जाने से काश्तकार खेतों में समय पर फसलों की बुआई नहीं कर पाए हैं।
गेहूं, मसूर, जौ, मटर आदि की बुआई का समय निकल चुका है, लेकिन फिलहाल बारिश के कुछ आसार दिखते नजर नहीं आ रहे हैं। जिन किसानों ने खेतों में किसी तरह बीजों को बोया भी है, वह भी नमी नहीं मिलने के कारण नष्ट होने लगी है।
मौसम विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2015 नवंबर में 5.3 और दिसंबर में 2 मिमी बारिश दर्ज हुई थी। जबकि इस वर्ष सितंबर से अभी तक बारिश की बूंदे तक नहीं टपकी। पर्यावरणविद् और ग्रामीण विजय जड़धारी, यूएस जड़धारी का कहना है कि बारिश नहीं होने के कारण कई स्थानों में किसान फसलों की बुआई नहीं कर पाए हैं।
पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय नहीं होने के कारण बारिश नहीं हो पाई है। काश्तकारों को मौसम के मिजाज को देखते हुए फसलों की की बुआई करनी चाहिए।
-प्रकाश नेगी, मौसम विभाग के तकनीकी अधिकारी रानीचौरी।