जिला एवं सत्र न्यायाधीश मीना तिवारी की अदालत ने एक हत्या आरोपी को आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। घनसाली तहसील के अंतर्गत ग्राम भौणा निवासी दर्शनी देवी ने थानाध्यक्ष घनसाली को 26 नवंबर 2014 को तहरीर दी थी कि उनके गांव में बालकृष्ण के घर पर उनके पुत्र अनिल की मेंहदी की रस्म थी।
मेंहदी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उसका पति वीरेंद्र सिंह और आरोपी सचेंद्र सिंह रावत पुत्र सत्ये सिंह रावत भी गए हुए थे। इस दौरान पुरानी रंजिश के चलते उन दोनों में झगड़ा हो गया, जिस पर बालकृष्ण और अन्य लोगों ने बीच बचाव कर दोनों को अलग कर दिया। लेकिन उसी रात करीब 12 बजे आरोपी सचेंद्र सिंह उसके पति वीरेंद्र सिंह को मारने की नियत से घर के पास ही घात लगाए बैठा था।
जैसे ही उनका पति वीरेंद्र अपने घर के लिए चला, आरोपी सचेंद्र ने उस पर जानलेवा हमला कर डंडे से पीट-पीटकर लहुलूहान कर दिया। सिर पर चोट लगने के कारण वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे बेलेश्वर अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे दून रेफर किया गया। दून में वीरेंद्र की पांच दिसंबर 2014 को मौत हो गई।
थाना घनसाली ने आरोपी के विरुद्ध कोर्ट में आरोप पत्र पेश किया। शनिवार को मामले की सुनवाई हुई। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश मीना तिवारी की अदालत ने सचेंद्र सिंह को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अभियोजन की ओर से डीजीसी-फौजदारी वीरेंद्र सिंह रावत ने पैरवी की।