ग्रामीण क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं को मुकाम पर पहुंचाने के बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन मिनी स्टेडियम निर्माण के लिए युवा कल्याण विभाग को निशुल्क भूमि नहीं मिल रही है, जिससे लंबे समय से स्वीकृत आधा दर्जन मिनी स्टेडियम का निर्माण शुरू नहीं हो पाया हैं।
पायका के तहत स्वीकृत 146 खेल मैदानों का निर्माण भी ठप पड़ा हुआ है। जिले के सेमंडीधार, खोलगढ, भेलुंता, कंडियालगांव, भैंगा, मडभागी में मिनी स्टेडियम स्वीकृत है, जिसके लिए शासन ने टोकन मनी के रूप में धनराशि जारी की है। बावजूद प्रत्येक स्टेडियम के निर्माण के लिए 40-40 नाली भूमि निशुल्क नहीं मिल पा रही है।
सरकार स्टेडियम निर्माण के लिए बजट तो देती है, लेकिन जमीन खरीदने के लिए पैसा नहीं देती है। ऐसे में विभाग के पास राजस्व भूमि और दान नामा भूमि के सिवाय दूसरा कोई विकल्प नहीं होता है। स्टेडियम के लिए गांव में भूमि नहीं मिल रही है।
सेमंडीधार में 44 लाख की धनराशि से स्वीकृत स्टेडियम के लिए सरकार ने 10 लाख भी उपलब्ध करवा दिए हैं, लेकिन केवल 15 नाली ही भूमि मिल पाई है। इसके अतिरिक्त पौखाल में स्पेशल कंपोनेट प्लान के तहत 98 लाख से स्वीकृत मिनी स्टेडियम को भी अभी तक केवल 33 नाली भूमि ही मिल पाई है, जबकि वर्ष 2010 से 13 तक पायका योजना के तहत 297 खेल ग्रामीण खेल मैदान स्वीकृत हुए थे, जिसमें से 151 का निर्माण ही पूरा हो पाया है।
बाकी 146 मैदानों के लिए भी भूमि संबंधी विवाद कार्यदायी संस्था ग्रामीण निर्माण विभाग सुलझा नहीं पाई है।
जिला युवा कल्याण अधिकारी एचएस खत्री का कहना है कि खेल मैदानों के लिए भूमि नहीं मिलने से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहे हैं। अब सरकार ने बड़े खेल मैदानों के बजाए छोटे-छोटे मैदान बनाने पर जोर दिया है। खेल मैदानों के निर्माण में आ रही दिक्कतों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।