टिहरी बांध की झील का जलस्तर आरएल 740 के करीब पहुंचने से झील में डूब चुकी ऐतिहासिक इमारतें भी दिखने लगी है। पुरानी टिहरी स्थित राजा का नया दरबार, रानी महल सहित अन्य इमारतें भले खंडहर हो चुकी हो, लेकिन जलस्तर कम होने से दिख रहे इमारतों के अवशेष लोगों की यादों को ताजा कर रही है।
बारिश नहीं होने से घटे टिहरी बांध की 42 सौ वर्ग किमी की झील का जलस्तर भले ही टीएचडीसी के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है, लेकिन पानी कम होने से झील में डूबी ऐतिहासिक इमारतें दिखने से लोगों की पुरानी यादें ताजा हो रही है।
टिहरी रिसायत के राजा कीर्तिशाह ने करीब 1890 के दशक में पुरानी टिहरी में रानीबाग के समीप कौशल दरबार (नया दरबार) और रानी महल का बनाया था। पारंपरिक शिल्प, पत्थरों से जोड़ने के लिए उड़द की दल से बनाए गए दोनों एतिहासिक इमारतों के निर्माण पर 10 साल का समय लगा था।
कौशल दरबार पर राजा की कोर्ट लगने से लेकर विभिन्न राजकाज निपटाया जा था, जबकि इसी के समीप बने रानी महल में रानी रहती थी। 1949 में टिहरी रियासत का विलय होने के बाद राज परिवार नरेंद्रनगर शिफ्ट हो गया था और इन इमारतों पर विभिन्न सरकारी कार्यालय चलते थे। वर्ष 2005 में टिहरी डूबने के बाद दोनों इमारतें झील में समा चुकी थी। समुद्र तल से लगभग 780 मीटर पर स्थित महल भले ही खंडहर में तब्दील हो चुके हैं, लेकिन दोनों महलों को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है।
खूबसूरत एवं ऐतिहासिक इन महलों को देखते के लिए पुरानी टिहरी में लोग खूब उमड़ते थे, लेकिन वर्तमान में जलस्तर कम होने से यादें ताज हो गई है। पर्यटन विभाग को इनके संरक्षण के लिए प्रयास करना चाहिए।
महीपाल नेगी, इतिहासकार।
विशेषज्ञों से राय लेकर इमारतों को सहजने के लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। ताकि पर्यटकों को एवं पुरानी टिहरी की यादों को ताजा रखा जा सके।
-सोवत सिंह राणा, जिला पर्यटन अधिकारी।