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55 लाख खर्च, फिर भी गांव अंधेरे में

Wed, 30 Mar 2016 08:52 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला टिहरी
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भिलंगना ब्लॉक के छह सीमांत गांवों को बिजली से रोशन करने की उरेडा की मुहिम परवान नहीं चढ़ पा रही है। लघु जल विद्युत परियोजनाओं पर 55 लाख खर्च होने के बाद भी गांवों तक बिजली नहीं पहुंच पाई है, जिससे गांवों की सात हजार आबादी छिल्लों के सहारे रात काटने को मजबूर है। पावर हाउस का आधा-अधूरा निर्माण होने के बाद उन्हें लावारिस हालत में छोड़ देने पर पावर हाउस खंडहर में तब्दील होते जा रहे हैं।
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पिंस्वाड़, उरणी, कोटी, झाला, मेढ, मरवाडी को बिजली से रोशन करने के लिए वर्ष 2006 धर्म गंगा के पास 200 किलोवाट की झाला लघु जल विद्युत परियोजना की स्वीकृति मिली थी। पिंस्वाड़ गांव के लिए कोटी में 50 किलोवाट योजना के लिए एक करोड़ 27 लाख की स्वीकृति मिली थी। अनुबंध के अनुसार कोटी-झाला लघु जल विद्युत परियोजना का निर्माण 2010 में पूरा होना था।

निर्माण अवधि के छह वर्ष बीतने के बाद भी कार्यदायी संस्था उरेडा कार्य पूरा नहीं कर पाई है, जिससे ग्रामीण अपने को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, जबकि लघु जल विद्युत योजनाओं पर अब तक 55 लाख खर्च हो चुका है।
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योजना निर्माण पूरा नहीं होने के लिए उरेडा और ग्राम समितियां अब एक दूसरे को जिम्मेदार बता रहे हैं। कोटी-झाला लघु जल विद्युत परियोजना का निर्माण कब तक पूरा हो पाएगा, इसका उरेडा के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। देखरेख के अभाव में पावर हाउस खंडहर में तब्दील होते जा रहे हैं।

उरेडा परियोजनाओं को बनाने में तकनीकी सहयोग और धन नहीं दे रहा है, जिससे समिति कार्य करने में असमर्थ है। उरेडा ने सहयोग और धन दिया, तो शीघ्र कार्य शुरू किया जाएगा।
-मालचंद बिष्ट, अध्यक्ष, कोटीझाला लघु जल विद्युत परियोजना

कोटी झाला लघु जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसमें फोर वे टैंकों पर कार्य चल रहा है। टरबाइन, जनरेटर और ट्रांसफार्मरों के आर्डर दे दिए गए हैं।
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-विजय रावत, परियोजना अधिकारी उरेडा नरेंद्रनगर
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