वन्य जीवों और मानव के बीच लगातार बढ़ रहे आपसी संघर्ष ने वन विभाग की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। संघर्ष से निपटने और बचाव के उपायों को लेकर बालगंगा रेंज की पहल पर ग्रामीणों के साथ बैठक की गई। गांव के आसपास जंगली जानवर दिखाई देेने पर तुरंत ही वन कर्मियों को सूचना देने की अपील की गई।
भिलंगना ब्लाक के थाती पट्टी के गांवों में कई दिनों से भालू की दहशत बनी है। भालू कई गांवों के खेतों में दिखाई दे रहा है। 19 नवंबर शाम को भालू के हमले में कुंडी गांव की मनीषा (18) पुत्री सूरत सिंह गंभीर रूप से घायल हो गई थी, जिसका एम्स ऋषिकेश में उपचार चल रहा है। पहले से ही ग्रामीण जंगली सूअर और बंदरों के झुंड से परेशान हैं। ग्रामीणों की मांग पर बृहस्पतिवार को चमियाला रेंज कार्यालय में वन कर्मियों और स्थानीय लोगों की बैठक हुई। बैठक में ग्रामीणों ने प्रत्येक गांव में शाम के वक्त वन कर्मियों से गश्त लगाने, जंगली सुअरों और बंदरों से निजात दिलाने की मांग प्रमुखता से उठाई। ग्रामीणों ने कहा कि सुअरों और बंदरों ने उसकी फसलों को बर्बाद कर दिया। जंगली जानवरों को गांव से दूर भगाया जाना चाहिए। रेंजर बीपी बधानी ने वन कर्मियों को संवेदनशील स्थानों पर तत्काल प्रभाव से नियमित गश्त शुरू करने को कहा। कहा कि जंगलों में चारापत्ति के लिए अकेेले न जाएं। बैठक में विजय भट्ट, हरिप्रसाद नौटियाल, सुमेर चंद रमोला, गोपाल सिंह रावत, रमेश डंगवाल, बिजेंद्र लाल, विजय राम जोशी, सुंदरलाल सकलानी, रामशरण उनियाल, सुर्जन सिंह पंवार, विकास पंवार व शंभू शरण डोभाल मौजूद रहे।