तहसील से भूमि विवाद में उलझे औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) भवन निर्माण अधर में लटका है, जिससे वर्ष 2004 से एक ट्रेड चला रहे संस्थान में स्वीकृत दो और ट्रेडों का संचालन भी खटाई में पड़ सकता है।
बंजर पड़ी ग्राम पंचायत की भूमि अपने नाम करने के बाद अब तहसील प्रशासन संस्थान को भूमि देने को तैयार नहीं है, जिससे मार्च 2016 तक भवन निर्माण शुरू होना मुश्किल है। ऐसे में संस्थान के भवन निर्माण को जारी 1.22 करोड़ रुपये लैप्स हो सकते हैं।
थौलधार ब्लॉक मुख्यालय कंडी में वर्ष 2004 में ब्लॉक कार्यालय के एक कमरे में तीन ट्रेडों के साथ आईटीआई खोली गई थी, लेकिन संस्थान जगह के अभाव में डाटा इंट्री आपरेटर के अलावा दो अन्य सिलाई-बुनाई और इलैक्ट्रीशियन का ट्रेड संचालित नहीं कर पाया है।
जगह की कमी से जूझ रहे संस्थान ने वर्ष 2007 में वहां खाली पड़ी पंचायत की 32 नाली भूमि पर भवन बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था, जिसके सापेक्ष मार्च 2015 में शासन से कक्ष-कक्षा बनाने के लिए एक करोड़ 22 लाख रुपये जारी किए गए। संस्थान जब भवन निर्माण की तैयारी करने लगा, तो पता चला कि वह भूमि तहसील प्रशासन ने वर्ष 2013 में अपने नाम दर्ज कर दी।
आईटीआई टिहरी के प्रधानाचार्य का कहना है कि दोनों विभागों के बीच विवाद बढ़ते देख स्थानीय लोगों की पहल पर सितंबर में एसडीएम के साथ हुई बैठक में 20 नाली भूमि आईटीआई और बाकी भूमि तहसील को देने का समझौता किया गया था, लेकिन अभी तक इस पर अमल नहीं हो पाया है जिससे संस्थान भवन निर्माण शुरू नहीं कर पा रहा है।