जमीन मिली, डीपीआर बनी अब भवन निर्माण का है इंतजार
नई टिहरी। स्थापना के 11 साल बाद भी आईटीआई नकोट को अपना स्थायी भवन नसीब नहीं हो पाया है। आईटीआई का संचालन अस्थायी व्यवस्था के तहत कराया जा रहा है। संस्थान के पास भवन नहीं होने के कारण छात्रों और संस्थान के कर्मियों को परेशानियां झेलनी पड़ रही है।
चंबा ब्लॉक के नकोट में संचालित आईटीआई एक निजी भवन के चार कमरों में संचालित हो रहा है। संस्थान के पास अपना भवन नहीं होने के कारण वहां स्वीकृत इक्ट्रिशियन, वेल्डर और फिटर ट्रेड में मात्र फिटर ट्रेड का ही संचालन हो रहा है। भवन के अलावा संस्थान में शिक्षकों और स्टाप की कमी बनी है।
वर्ष 2014 में आईटीआई नकोट को स्वीकृति मिली थी। 11 वर्ष बाद भी संस्थान निजी भवन पर ही संचालित हो रहा है। भवन के अभाव में छात्र संख्या 13 से अधिक नहीं बढ़ पा रही है। स्थानीय लोग लंबे समय आईटीआई भवन के निर्माण के साथ स्वीकृत ट्रेडों के संचालन की मांग कर रहे हैं। जगह की कमी के कारण तकनीकी शिक्षा के दौरान छात्रों की पढ़ाई में उपयोग में आने वाले उपकरणों की संस्थान खरीदारी भी नहीं कर पा रहा है।
क्षेत्र के लोगों ने संस्थान में युवाओं के लिए कंप्यूटर एप्लिकेशन कोपा विषय के संचालन की मांग की है लेकिन भवन नहीं होने के कारण कोपा की स्वीकृति भी नहीं मिल पा रही है। वर्ष 2018 में जिला प्रशासन ने संस्थान के भवन निर्माण के लिए नकोट कस्बे से करीब तीन किमी दूर फैगुल गांव के पास 11 नाली से अधिक भूमि उपलब्ध कराई थी लेकिन शासन से बजट नहीं मिलने के कारण संस्थान का भवन नहीं बन पाया।
जिस स्थान पर संस्थान के भवन का निर्माण किया जाना है। उस भूमि की जांच कराने के बाद करीब 13़ 24 करोड़ की डीपीआर तैयार कर शासन को भेजी जा चुकी है। शासन स्तर से धनराशि मिलने के बाद भवन निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
पल्ल्वी, नोडल अधिकारी, आईटीआई टिहरी