रोजगार के लिए विदेश जा रहे युवाओं को वहां होटल मालिकों के उत्पीड़न का शिकार होना पड़ रहा है, जिससे वे घर वापसी के लिए छटपटा रहे हैं। इस तरह पासपोर्ट जब्त कर उत्पीड़न की शिकायतें कई बार आने पर भी युवा बगैर जांच-पड़ताल के ही खाड़ी देशों का रुख कर रहे हैं, जिससे उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सउदी अरब में मालिक के चंगुल में फंसे सात युवाओं में से तीन के स्वदेश पहुंचने पर उन्होंने राहत की सांस ली है।
विदेश जाकर उज्ज्वल भविष्य का सपना देख रहे युवाओं के लिए मंहगा साबित हो रहा है। एजेंटों के माध्यम से खाड़ी देशों में जा रहे युवा वहां मालिकों के उत्पीड़न का शिकार बन रहे हैं। समय पर वेतन नहीं देने और पासपोर्ट जब्त करने से वह घर वापसी के लिए तड़प रहे हैं। एक माह पहले ही सउदी अरब में सात युवाओं के पासपोर्ट जब्त कर उनसे जबरन काम कराने का मामला सामने आया था, जिस पर डोबरा-चांठी पुल बनाओ संघर्ष समिति के संयोजक राजेश्वर पैन्यूली ने विदेश मंत्रालय से संपर्क उनकी वतन वापसी की गुजारिश की थी।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के हस्तक्षेप पर उत्तराखंड निवासी विक्रम सिंह पुत्र श्री गोविंद सिंह कैंतुरा, सुमेर सिंह पुत्र श्री प्रेम सिंह और दिल्ली निवासी सचिन शर्मा पुत्र श्री करण सिंह स्वदेश पहुंचने में कामयाब हुए हैं, जबकि वीरेंद्र सिंह भंडारी, सुभाष चंद्र पांडे, सचिन सिंह और गजेंद्र सिंह भंडारी अभी घर वापसी को बेताब हैं। उनके साथ ही आनंदी लाल पुत्र भादूलाल ग्राम सरूना घनसाली टिहरी के भी ओमान में फंसे होने की सूचना है। उन्होंने विदेश मंत्री से पीड़ित सभी भारतीयों को स्वदेश पहुंचाने में मदद करने की मांग की है।