कंडीसौड़ (टिहरी)। टिहरी बांध प्रभावित सरोट-डोभन के ग्रामीणों ने पुनर्वास निदेशालय के शिकायत निवारण प्रकोष्ठ की ओर से पूर्व में दिए गए आदेश के अनुपालन में वंचित प्रभावितों को कृषि और आवासीय भूखंड आवंटित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि टीएचडीसी ने शिकायत निवारण प्रकोष्ठ के निर्णय के खिलाफ वर्ष 2015-16 के दौरान उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी, जिसका अभी तक निस्तारण नहीं हो पाया है। उन्होंने टीएचडीसी से न्यायालय में दायर वाद वापस लेकर प्रभावितों को कृषि और आवासीय भूखंड आवंटित करने की मांग की है।
थौलधार ब्लाॅक में सरोट-डोभन और खांड-बिड़कोट के बांध प्रभावितों ने टीएचडीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक को भेजे ज्ञापन में कहा है कि वर्ष 2007 से 2018 के दौरान शिकायत निवारण प्रकोष्ठ ने करीब 252 लोगों की पात्रता स्वीकृत की थी। उनमें से 230 परिवारों को उसी दौरान कृषि/आवासीय भूखंड आवंटित कर दिए गए थे, लेकिन टीएचडीसी ने शिकायत निवारण प्रकोष्ठ द्वारा दिए गए निर्णय में से 22 परिवारों की पात्रता के खिलाफ वर्ष 2015-16 में उच्च न्यायालय में अपील दायर कर दी थी, जो अभी तक न्यायालय में लंबित पड़ी हुई है।सरोट के पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य रोशन लाल ने बताया कि पुनर्वास निदेशालय ने उन 22 में से चार परिवारों को वर्ष 2022 में लॉटरी के माध्यम से कृषि और आवासीय भूखंड आवंटित कर दिए हैं, लेकिन अन्य 18 परिवारों को न्यायालय का हवाला देकर छोड़ दिया गया है। इससे वे परिवार पुनर्वास के इंतजार में बैठे हैं।
पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य ने कहा कि पात्रता का निर्धारण होने के बावजूद भूखंड आवंटन नहीं करने पर ग्रामीण अपनी मांग को लेकर वर्ष 2010 से लगातार पत्राचार और आंदोलन करते आ रहे हैं, लेकिन कोरे आश्वासनों के सिवा अभी तक कुछ नहीं मिल पाया है। आर्थिक रूप से कमजोर बांध प्रभावित न्यायालय में भी अपनी पैरवी करने में सक्षम नहीं है, जिससे टीएचडीसी से न्यायालय में दायर वाद वापस लेने की अपील की गई है।
उन्होंने कहा कि इन 14-15 सालों में लगातार पत्राचार और आंदोलन करते हुए ग्रामीण थक चुके हैं। 21 अक्तूबर 2024 तक भूखंड आवंटित करने की कार्रवाई शुरू नहीं की जाती है, तो उनके पास टिहरी बांध की झील में जल समाधि लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।