सेम स्वांला गांव में रविवार शाम जिस बच्चे को गुलदार उठा ले गया था, देर रात उसका अधखाया शव गांव से कुछ दूर बरामद किया गया। घटना से लोगों का गुस्सा भड़क उठा। उनका कहना था कि जब तक गुलदार को नरभक्षी घोषित कर उसे मारने के लिए शूटर तैनात नहीं किया जाएगा, तब तक शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
लोगों का गुस्सा बढ़ता देख विभाग ने गुलदार को नरभक्षी घोषित कर उसे मारने के आदेश दिए। ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचे डीएफओ को बंधक बनाकर तत्काल शूटर तैनात करने की मांग की। शाम पांच बजे शूटर तैनात होने के बाद ही उन्होंने डीएफओ को छोड़ा।
रविवार को बाल गंगा रेंज के ग्राम सेम स्वांला गांव में शाम को आंगन में खेल रहे दौलत (13) पुत्र चैत लाल को गुलदार उठा ले गया था। देर रात बच्चे का अधखाया शव गांव से कुछ दूर मिला। सूचना पर वन कर्मी भी देर रात गांव पहुंचे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 21 अगस्त को ही क्षेत्र के तलेबन गांव की बरखा देवी पर भी गुलदार ने हमला कर उन्हें घायल कर दिया था। बावजूद विभाग ने पिंजरा नहीं लगाया।
गांव के सुंदर सिंह कठैत, जितेंद्र सिंह कठैत, सोहन लाल, सुनीता देवी, दिग्पाल कठैत, प्रेमलाल त्रिकोटिया, सोबत सिंह कठैत, विनोद कठैत ने कहा कि वन विभाग की लापरवाही के कारण ही बच्चे की जान गई है। ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचे डीएफओ सहित अन्य वन कर्मियों को बंधक बना दिया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जब तक शूटर तैनात नहीं किया जाता, तब तक शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
डीएफओ डा. कोकोरोसो ने बताया कि गुलदार को नरभक्षी घोषित कर मारने के आदेश दिए गए हैं। शाम पांच बजे शूटर गंभीर सिंह भंडारी के वहां पहुंचने पर ही ग्रामीणों ने डीएफओ को छोड़ा दिया। परिजनों फौरी तौर पर 90 हजार रुपये की मदद दी गई। शेष 2.10 लाख की राशि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद दी जाएगी।