फिर से विधानसभा चुनाव हैं, लेकिन पांच साल पहले जनता को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने का आश्वासन देने वाले नेता इस बार फिर से वही राग अलाप रहे हैं। पांच सालों में सड़क, स्कूल समेत अन्य समस्याओं का कुछ हद तक समाधान भी हुआ, लेकिन अस्पतालों में डाक्टरों की कमी दूर नहीं हो पाई।
जिला बौराड़ी अस्पताल, संयुक्त चिकित्सालय नरेंद्रनगर से लेकर 11 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 28 एलोपैथिक चिकित्सालय, 23 अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र, समेत 204 स्वास्थ्य केंद्र छह लाख की अधिक जनसंख्या को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए खोले गए हैं, लेकिन अधिकांश अस्पतालों में वर्षों से डाक्टरों की तैनाती नहीं होने से ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही है।
जिले में 206 डाक्टरों के पद सृजित हैं। इसके सापेक्ष 99 डाक्टर ही कार्यरत हैं। इनमें से भी 51 से डाक्टर संविदा पर तैनात हैं। जिला अस्पताल में फिजीशियन, एनेस्थीसिया, सर्जन, ईएनटी, चर्मरोग आदि महत्वपूर्ण चिकित्सकों के पद वर्षों से रिक्त होने से चिकित्सालय रेफर सेंटर बना हुआ है। वर्ष 2012 के चुनाव में सत्ता पक्ष, विपक्ष के नेताओं ने स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनने का आश्वासन दिया था, लेकिन स्थिति जस की तस बनी है।
डाक्टरों के रिक्त पदों को भरने के लिए नियमित शासन को प्रस्ताव भेजा जा रहा है। बौराड़ी अस्पताल में सर्जन की नियुक्ति हुई थी, पर सर्जन ने ज्वाइन नहीं किया। तैनात 99 में से 51 डाक्टर संविदा पर कार्यरत है।
-डा. अर्जुन सिंह सेंगर, सीएमओ टिहरी।