कोठियाड़ा गांव के जिन बच्चों के हाथों में कॉपी-किताब होनी थी। वे हाथ पत्थर तोड़ने को मजबूर हैं। प्रशासन की ओर से छत नहीं मिलने पर ग्रामीण खुद ही मकान बनाने में जुट गए हैं। मुख्यमंत्री की ओर से बनाई गई आपदा प्रबंधन कमेटी भी घोषणा तक ही सिमट कर रह गई है।
भिलंगना ब्लॉक में 28 मई को बादल फटने से कोठियाड़ा में भारी तबाही मच गई थी। गांव के 72 परिवारों के घर मलबे में दब गए थे। दर्जनों पशुओं की भी मौत हो गई थी। आपदा से बेघर हुए लोगों के पास सिर छुपाने के लिए कोई आसरा नही बचा है।
आपदा के बाद से ग्रामीण गांव के पास गंवाणा बेसिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में डेरा डाले हैं। सीएम की घोषणा के बावजूद ग्रामीणों को अस्थाई टीनशेड नहीं मिल पाए हैं। प्रशासन की ओर से स्कूल के पास 610 टीन डाली गई है, लेकिन वह पर्याप्त नहीं है।
प्रभावित गंगा प्रसाद, सवित्री और प्रीति का कहना है कि जिन बच्चों के हाथों में कॉपी-किताबें होनी थी, उनके हाथों में पत्थर तोड़ने के लिए हथोड़ी थमाई गई है। उनकी किताबें भी मलबे में ही दब गई हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने गांव में आकर अस्थाई घर बनाने की बात कही थी, लेकिन अभी तक सिर्फ कुछ टीन की चादर ही डाली गई है।
ग्रामीण टीनशेड बनाने के लिए मना कर रहे हैं। इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को दी गई है। अब वहां से दिशा निर्देश मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- एसएस बागड़ी, प्रभारी तहसीलदार, घनसाली।