भागीरथी नदी घाटी विकास प्राधिकरण की महायोजना आखिरकार 11 साल बाद तैयार हो गई है। महायोजना में उत्तरकाशी और टिहरी जिले के 10 विकास खंडों को शामिल किया गया है। महायोजना के एक्ट का उल्लंघन करने पर 20 हजार तक का जुर्माना लगाए जाने का प्राविधान किया गया।
पत्रकार वार्ता में भागीरथी नदी घाटी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष कीर्ति सिंह नेगी ने कहा कि प्राधिकरण की महायोजना नहीं बनने से भागीरथी और भिलंगना घाटी के विकास के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे थे, लेकिन अब दोनों घाटी में भूधसांव, खनन रोकने, रोजगार के अवसर पैदा करने सहित कई महत्वपूर्ण कार्य हो सकेंगे।
उन्होंने कहा कि टिहरी एवं उत्तरकाशी के दस विकास खंडों में जाकर जन सामान्य से महायोजना के संबंध में सुझाव लिए थे। बताया कि नदी घाट का क्षेत्रफल 7809.59 वर्ग किमी है। महायोजना में टिहरी झील के चारों ओर 200 मीटर की परिधि में किसी भी तरह का निर्माण नहीं किया जा सकेगा।
जनहित के कार्यों के लिए प्राधिकरण से अनुमति ली जानी जरूरी होगी। महायोजना में टिहरी के प्रतापनगर, थौलधार, चंबा, नरेंद्रनगर, देवप्रयाग, जाखाणीधार और भिलंगना ब्लाक और उत्तरकाशी जिले के भटवाड़ी, डुंडा और चिन्यालीसौड़ को इसमें शामिल किया गया है।
महायोजना का अंतरिम ड्राफ्ट 19 जनवरी को अनुमोदित किया गया था। प्राधिकरण ने चार ज्योग्रोफिकल जोन बनाए हैं। वहीं मैपिंग कर इसे वेबसाइट भी प्रदर्शित किया जा चुका है। इस मौके पर नागरिक मंच के कमल सिंह महर, अपर निजी सचिव जयराज सिंह आदि मौजूद रहे।