उत्तराखंड आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ता यूनियन ने 12 सूत्री मांगों के निराकरण को लेकर सीएमओ कार्यालय के बाहर धरना दिया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से सरकारी कर्मचारी का दर्जा देकर न्यूनतम 21 हजार वेतन की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही है।
मंगलवार को आशा कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष गीता नेगी के नेतृत्व में धरना देकर समस्याओं के निराकरण की मांग की। उन्होंने नारेबाजी करते हुए सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने सीएमओ को दिए ज्ञापन में सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, सेवानिवृत्त पर पेंशन, दुर्घटना पर एक मुश्त पैकेज, सीएम की घोषणा के अनुसार भत्ता तत्काल उनके खातों में डालने, कोविड डयूटी में लगे आशाओं का 10 लाख का स्वास्थ्य बीमा, मृत्यु पर 50 लाख का बीमा, चार लाख की अनुग्रह राशि देने समेत 12 सूत्री समस्याओं के निराकरण करने की मांग की। धरना देने वालों में जिला सचिव कुसुम सलोनी, सुषमा रावत, चेतना नेगी, शशि चौहान, सोनी नेगी, संजना उनियाल, संजना उनियाल, लक्ष्मी काला, रजनी काला, आशा बहुगुणा, ममता पुंडीर, रजनी खंडूड़ी, अंजना सुयाल, लक्ष्मी नेगी, सीता, मंगली, सावित्री, कमलेश्वरी आदि शामिल थे।
उधर, श्रीनगर में विकास खंड कीर्तिनगर के विभिन्न गांवों की आशाएं तहसील मुख्यालय पहुंचीं। ब्लॉक अध्यक्ष लक्ष्मी जोशी ने कहा कि 16 साल से गांव की स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली आशा सरकार की उपेक्षापूर्ण नीति से हताश और निराश हैं। इस मौके पर पुष्पा देवी, सरिता, प्रभा, छुन्ना, अनिता, कमला, रामेश्वरी, संतोषी, शशी, विनीता, बीना, रेखा, किरन, सुधा, सुनीता, बबीता, मंजू व देवेश्वरी आदि मौजूद थीं।