ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे पर बेमुंडा से नरेंद्रनगर के बीच बने डेंजर जोन से निपटने के लिए वैकल्पिक मार्ग के तौर पर प्रस्तावित जाजल-शिवपुरी सड़क निर्माण में आड़े आ रही वन भूमि की केंद्र सरकार से सालभर से एनओसी नहीं मिल पाई है, जिससे बारिश के समय लोगों को जोखिमभरी यात्रा करनी पड़ रही है। फारेस्ट से एनओसी कब तक मिलेगी इस पर भी अभी तक संशय बना हुआ है।
बरसात में हाईवे पर नरेंद्रनगर के कुम्हारखेड़ा, बगरधार, दुआधार और ताछिला के पास अक्सर भारी भूधंसाव होने से यातायात बाधित होता रहता है। सड़क को अस्थायी तौर पर खोलकर लोगों को जान जोखिम में डालकर यात्रा करनी पड़ती है। पिछले वर्ष 18 जुलाई 2016 को कुम्हारखेड़ा में ही पहाड़ी धंसने से चंबा-ऋषिकेश मोटर मार्ग पांच दिन तक बंद रहा। मलबे में दबकर चार कार सवारों की मौत हो गई थी। इसी तरह बरसात में हर साल बगरधार, दुआधार और ताछिला में भी भूधंसाव होने से यातायात बाधित होता है। आगर गांव के पास भी सड़क काफी धंस चुकी है।
समस्या से निपटने के लिए वैकल्पिक मार्ग के तौर पर वर्ष 2015 में जाजल-शिवपुरी 23 किमी सड़क निर्माण प्रस्तावित किया गया था, लेकिन सड़क के बीच आठ किमी क्षेत्र में आ रही वन भूमि की एनओसी सालभर से भी अधिक समय से नहीं मिल पाई है। वह सड़क बनने से जहां यात्रा सुगम हो जाएगी, वहीं लोगों को चंबा से ऋषिकेश पहुंचने के लिए 12 किमी की दूरी भी कम हो जाएगी।
जाजल-शिवपुरी मोटर मार्ग डबल लेन प्रस्तावित है। मार्ग पर आ रही वन भूमि की एनओसी के लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार को सालभर पहले भेजा गया था। स्वीकृति मिलने के बाद डीपीआर बनाई जाएगी। फिलहाल सड़क के दोनों ओर से निर्माण चल रहा है।
- मो. आरिफ खान, ईई, लोनिवि नरेंद्रनगर।